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ननदोई जी की ताक़त
01-15-2014, 07:59 PM
Post: #1
Wank ननदोई जी की ताक़त
मेरा नाम है शोभा है, मैं एक बेहदकामुक किस्म की औरत हूँ मुझे मोटे लंड बहुत पसंद हैं, मेरे पति का कोईख़ास नहीं है, कह लो बेहदबकवास है।शादी करके मैं ससुराल आई तो  पहली रात को मुझे डर था कि मेरी चोरीन पकड़ी जाए। मेरी चूत खुली हुई थी क्यूंकि शादी से पहले ही में कई लड़कों के साथ रंगरलियाँ मना चुकी थी।पहली रात तो बच गई। रस्मों के चलते पंजाब में अभी गाँव में भी और शहरोंमें भी पहली रात लड़की अपने साथ मायके से भाई को लाती है या बहन को। दूसरी रात को मुझेकमरे में बिठा दिया गया था घूंघट में। मैं उनका इंतज़ार कर रही थी । वो आये तो मेरीधड़कन बढ़ने लगी।उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और मेरे करीब आये । उन्होंने  काफी पी हुई थी। मेरी चुनरी उतार करये मुझे पकड़ कर चूमने लगे, औरबोले- वाह ! कितनी खूबसरत हो !
अच्छा हुआ कि वो नशेमें थे। मेरी भाभी, जो कि मेरी हमराज़ थी,  ने मुझे कहाथा कि जब वो लौड़ा घुसाने लगें तो तू सासें खींच लेना और जांघें कस कर दर्द की एक्टिंग करना! इन्होंने मुझे ऊपर से नंगी कर लिया और मेरा दूध पीने लगे- हाय ! क्या मस्त मम्मे हैं तेरे !
वो मेरे निप्पल को चूसनेलगे । मैं बहकनेलगी, दिल करनेलगा कि उनका लौड़ा पकड़ कर सहलाऊँ और  चूसूँ ! लेकिन खुद को शरीफदर्शाना थाइसलिए अपनी वासनाअपने दिल में दबा ली। ये मेरे ऊपर चढ़ गए । मेरे होंठ चूसतेहुए नीचे से मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया। खुद के कपड़े नहीं उतार रहे थे। सलवार उतारकर मेरी  पैंटी खिसकाई और मेरी फ़ुद्दी कोचाटने लगे।मैं कसमसाने लगी। मैंने देखा कि उनका लौड़ा  खड़ा नहीं हुआ नहीं दिख रहा था । मुझे तो देख कर हीलड़कों के कपड़ों में खड़े हो जाते थे, फिर इन्होंने तो मुझे नंगी किया था। आखिर उन्होंने अपनापजामा खोला और मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया।  इतना छोटा लौड़ा ! पतला सा ! मेरे अंदर क्रोध सेआग लग गई लेकिन मैंने दिखावा किया कि मैं इनका लोडा देख कर डर गई हूं। इन्होंने मेरी फ़ुद्दी को चाटना ज़ारी रखा। शायद मुझे उसी से शांत करने का इरादा था।
अतिम पलों में अपनाछोटा सा लौड़ा घुसा कर झटके दिए । मैंने सांसें भी खींची, जांघें भी कस ली फिरभी इनका आसानी से घुस गया था। दो मिनट में अपना पानी निकाल हांफने लगे और बिना कोई बात कियेसो गए।पहली रात मेरी चोरी नहीं पकड़ी गई लेकिन दिल भी टूट गया। सुबह एक रस्म थी, मेरे सामने बैठे थेमेरे ननदोई जी। हट्टे-कट्टे थे, चौड़ा सीना, घने बाल, मरदाना मूछें ! मेरी नज़र उनसे टकरागई, वो पहले दिनसे मुझे बहुत प्यासी नज़रों से देखते थे लेकिन नई नई शादी का लिहाज कर मैंने उनको शह नहीं दी थी। लेकिन सुहागरात के बाद आज मैंने भी अपनी आँखों में सूनापन दिखा दिया।
हमारी शादी के तीनदिन बाद ही मेरी सबसे छोटी ननद की भी शादी रखी थी, मेरी तो शादी नई हुईथी, मेहँदीवगैरा पहले लगी थी,ना मुझे पार्लर की ज़रुरत थी। दोपहर को ही दारू कादौर चला बैठे ननदोई जी ! सासू माँ ननद को लेकर बाज़ार चली गई थी, बाकी सभी घर के मर्दबहन की शादी का इंतजाम कर रहे थे, घर में आखिरी शादी थी, कसर कोई छोड़ना नहींचाहता था, पति देवअपनी बहनों- भाभियों को लेकर शहर मार्केट ले गए मेहँदी लगवाने
ससुर जी के साथ बैठननदोई सा पैग-शैग का लुत्फ़ उठा रहे थे।  मैं उठकर अपने कमरे की तरफ चल दी। मुझे उम्मीद थी किननदोई जी सुबह मेरी आँखों में जो प्रश्न थे, उनका उत्तर जानने तो आयेंगे ही। मैंने चुनरी उतारबिस्तर पर डाल दी और बाथरूम में चली गई। मेरा कमीज़ काफीगहरे गले का था जिससे मेरी चूचियों का चीर बेहद आकर्षक दिख रहा था, जिसमें कालामंगलसूत्र खेल रहा था। मुझे यह उम्मीद थी कि शायद ननदोई जी आयें ! मेरी कमीज़ छाती सेकाफी कसी हुई रहती है क्यूंकि मुझे अपने मम्मे दिखाने का शुरु से शौक था। जब बाथरूम से निकलीथी तो सामने ननदोई जी को देख में इतना हैरान नहीं थी, फिर भी शर्माने कानाटक किया- आप यहाँ?
मैं अपनी चुनरी पकड़नेलगी।मेरे से पहले उन्होंने पकड़ ली, बोले- इसके बिना ज्यादा खूबसूरत दिखती हो !
मेरे गाल लाल होनेलगे- प्लीज़ दे दो ना !
"क्या हुआ? नई भाभी, सुबह तो आपकी नज़रोंमें कुछ था? लगता है किहमारे साले साब पसंद नहीं आये या फिर वो कुछ??" कहते कहते रुक गए, मेरे करीब आये और बोले-लाओ मैं अपने हाथों से चुनरी औढ़ा देता हूँ।"
वो मेरे बेहद करीबथे, चुनरी तो देदी, उसको गले सेलगा दिया ताकि मेरी छाती के दीदार उनको होते रहें।
"मंगलसूत्र कितना प्यारा लग रहा है !"उसको छूने के बहाने मेरे चीर को उंगली से सहला दिया।
मेरा बदन कांप सागया, सिहर सीउठी।
"क्या हुआ भाभी?" उंगली मेरी कमीज़ केगले पर अटका कर खींचा, अन्दर झांकते हुए बोले- वाह क्या खूबसूरत वादी है दो पहाड़ोंके बीच में!"
उन्होंने प्यार सेमेरे मम्मे को सहलाया।
"प्लीज़ छोड़ दीजिये, कोई देख लेगा, आते ही बदनाम होजाऊँगी !"
"यहाँ कौन है भाभी? ससुर जी तो उलटे होगए पी पी कर ! देखो,दरवाज़ा मैंने बंद किया हुआ है ! क्या देख रही थी आप सुबह?"
मेरी कमर में बाजूडालते हुए अपनी तरफ सरकाया मेरी छाती उनके चौड़े सीने से दबने लगी।
"वाह कितना कसाव है आपकी छाती में, मेरी बीवी तो ढीलीहो गई है।"
मैं उनके सीने परनाज़ुक उँगलियाँ फेरती हुई बोली- क्या ढीला हो गया उनमें?
"सब कुछ! अब तो उसमे मज़ा ही नहीं रहा!"मेरे होंठ चूमते हुए बोले- रात कैसी निकली भाभी? सही सही बताना !
"इनको प्यार करना नहीं आता, औरत की फीलिंग नहीं समझते। खुद सो गए और  मैं पूरी रात झल्लाती रही हूँ।"
उन्होंने मुझे घुमालिया, पीछे सेमुझे बाँहों में कस लिया कमीज़ को उठाया और अपना हाथ मेरे सपाट चिकने पेट पर फेरने लगे। मेरे जिस्म में आग लगने लगी। पीछे से मेरे चूतडों पर दबाव डाला।मुझे इनका लौड़ा खड़ा हुआ महसूस हुआ।  मैंने भी चूतड पीछे की तरफ धकेले- हाय, एक आप हैं । देखो प्यार करनेका अंदाज़ ! आपने अपने हाथों के जादू से मुझे खींच लिया है, वैसे आप बहुतज़बरदस्त मर्द दिखते हैं।"
"असली मर्दानगी तो अभी दिखानी है।" मेरीगर्दन को चूमने लगे। यह औरत को गर्म करने की सबसे सही जगह है। एक हाथ पेट परथा, होंठ गर्दनपर !ननदोई जी ने पीछे से मुझे बाँहों में कस लिया। कमीज़ को उठाया और अपना हाथमेरे सपाट चिकने पेट पर फेरने लगे। मेरे जिस्म में आग लगने लगी। मेरी आंखें चढ़ने लगीथी, कब मेरानाड़ा खोल दिया, पता नहींचला। सलवार जब गिरी तब मुझे काफी शर्म आई।
"वाह कितने कोमल चूतड़ हैं आपके !
"यह क्या किया? आपने मेरी सलवार खोलदी?"
"सब कुछ खोलना है भाभी !"
"नहीं ननदोई जी, यह जगह सही नहीं है, दोनों की इज्ज़त जायेगी।बात को समझो, नई नईदुल्हन हूँ, कोई भीदेखने आ सकता है।"
"चल एक बार लौड़ा चूस दे थोड़ा ! फिर मैं चलाजाता हूँ, रात तकइंतजाम हो जाएगा।" वो बैड के किनारे बैठ गए।
मैंने अपने सारेकपड़े पहन लिए, उनकी जिपखोल ली, उनका लौड़ादेख मेरा मुँह खुला रह गया ! इतना बड़ा था उनका!!
"कैसा लगा, भाभी?"
मैंने सुपारे कोमुँहं में लेकर चूसा- बहुत टेस्टी लौड़ा है आपका !
"इसको जब अंदर डलवाओगी, तुम्हे इतना मजादूँगा कि बस !"
मैंने जोर जोर सेउनका लौड़ा चूसना चालू किया, मेरे अंदाज से वो इतने दीवाने हुए, मेरे बालों में हाथफेरते हुए लौड़ा चुसवाने लगे। अचानक उन्होंने लौड़ा अपने हाथ में लिया, तेज़ी से हिलाने लगे, बोले- भाभी मुँह खोललो, आँखें बंदकर लो !
उनके लौड़े से इतनापानी निकला, कुछ होंठोंपर निकला, बाकी पूरामेरे मुँह के अंदर माल छोड़ा। मैं उनका पूरा माल गटक गई।
उन्होंने कहा- वाह, कितने नाज़ुक होंठहैं आपके ! मजा आ गया, रात तक कुछ कर दूंगा, शोभा डार्लिंग !
"हाय ननदोई सा ! आपका तो बहुत तगड़ा है!"
"बहुत जल्दी हत्थे चढ़ गई, लगता है बहुत गर्मलड़की रही हो शादी से पहले?"
शाम हुई, सभी लौट आये, मैं एक नई दुल्हन कीतरह मुख पर लज्जा लाकर सबके बीच बैठ गई। सभी लेडीज़ संगीत का आनन्द उठा रहे थे, ननदोई जी की नजर मुझपर थी।तभी उन्होंने मुझे और मेरे पति को अपने पास बुलाया, ननद जी को भी पासबुला कर बोले- आज हम दोनों की तरफ से एक बड़ा सरप्राईज़ है !
"वो क्या?"
"यह लो चाभी !"
"यह क्या जीजा जी?" मेरे पति बोले।
"यह होटल के कमरे की चाभी है साले साहेब ! नईनई शादी हुई है और घर में कितनी भीड़ है। एक साथ दो दो शादियाँ रख दी गई, मेरे और ॠतु की तरफसे यह स्वीट आपके लिए बुक करवा हुआ है मैंने !" ननदोई जी ने बताया।
शर्म से आंखें झुकाली मैंने ! पता नहीं क्या पैंतरा होगा यह ननदोई जी का?
"नहीं दीदी, हमें तो सबके साथरहना है।" मैंने कहा।
"शोभा, तब तक संगीत ख़त्म हो जाएगा ! रात ही तोजाना है, हमें कुछनहीं सुनना !" मेरी ननद बोली।
ननदोई जी इनको अपनेसाथ ले गए, इनको अपनीकार की चाभी भी दे दी, और इकट्ठे बैठ कर दारु पीने लगे, ननदोई जी ने इन्हेंभी काफी पिला दी।अचानक से ननदोई जी फ़ोन सुनने के लिए एक तरफ़ गए, फिर ननद के पास गए, बोले- मुझे अभीचंडीगढ़ के लिए निकलना होगा, सुबह आठ बजे एक एहम मीटिंग आ गई है।
फ़िर हम दोनों कोबुला कर बोले- यार शरद, मुझे अभी चंडीगढ़ निकलना है, माफ़ करना, कार की चाभी मांगरहा हूँ।
"कोई बात नहीं जीजा जी, ऐसा करो, मैं तुम दोनों को होटलछोड़ता हुआ निकलता हूँ, सुबह कैब से लौट आना ! ठीक है?"
"लेकिन खाना?" दीदी बोली।
"इनका वहाँ डिनर भी साथ प्लान है और मैंने तोकाफी स्नैक्स खाएं हैं चिकन के !"
हम वहाँ पहुँच गएआलीशान होटल में ! इनको काफी चढ़ चुकी थी, ये बोले- जीजा जी, डिनर हमारे साथ करकेनिकल जाना, तब तक पैगशैग हो जाए?
ननदोई जी बोले- चलठीक है।
बोतल मेज पर सज गई, मोटे मोटे पैग बनाये, ननदोई जी ने तो अपनाथोड़ा पिया, इन्होंने एकसांस में पूरा खींच मारा।
मैंने सामने देखाउन्होंने मुझे आँख मारी- तेरा पैग ख़त्म हो गया, यार खाली ग्लासअच्छा नहीं लगता पकड़ यह !
ये वहीं लुढ़कने लगे।
"खाना कमरे में मंगवा लेते हैं।"
एक बहुत प्यारा साकमरा था, बड़ीमुश्किल से ये कमरे तक गए। मैंने अपना सूटकेस रख दिया, उसमें से गुलाबी रंगकी बेहद आकर्षक पारदर्शी नाईटी निकाली क्यूंकि मैं ननदोई जी का पैंतरा समझ गई थी। जब मैं वाशरूम गई, ननदोई जी ने इनकोफ़िर मोटा पैग लगवा दिया, ये सोफे पर लुढ़क गए, ननदोई जी ने इन्हें उठाकर बिस्तर पर लिटाया, मुझे देखा तो देखतेरह गए।
"इसको तो हो गई।"
जूते उतारे, कम्बल ओढा कर सुलादिया और मुझे बाँहों में लेकर बोले- बहुत हसीन दिख रही हो, रानी !
मैंने उनके गले मेंबाहें डालते हुए उनके होंठों पर होंठ रखते हुए कहा- आपका दिमाग बहुत तेज चलता है?
बोले- बियर भी है, एक छोटा सा लोगी? सरूर आ जाएगा।
उनके कहने पर मैं एकमग बियर गटक गई, मुझे सरूरहुआ उठकर उनकी गोदी में बैठ गई, आगे से नाईटी खोल दी, काली ब्रा में कैदमेरे मम्मे देख उनका तन तन जा रहा था। ननदोई जी मेरे मम्मेदबाने लगे, मैं सी सीकर रही थी। ब्रा की साइड से निकाल मेरा निप्पल चूसा।
"ये कहीं उठ गए तो पकड़े जायेंगे !"
"बहुत तेज़ दारु पी है इसने ! वो भी नीट केबराबर !"

बोले- डोंट वरी, मैंने दो रूम आगे एकअलग स्वीट बुक किया है हम दोनों के लिए !"


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01-15-2014, 08:00 PM (This post was last modified: 01-15-2014 08:04 PM by porngyan.)
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Wank RE: ननदोई जी की ताक़त
इनको सुला कर हमबाहर से लॉक कर चाभी लेकर दूसरे स्वीट में चले गए, वहीं बैठ एक एक मगबियर का पिया, मैंने मेजसे सामान उठाया, नाईटी उतारफेंकी, ननदोई जी केसामने नंगी होकर बिस्तर पर लहराने लगी।
"हाय मेरी जान शोभा ! बहुत मस्त अंदाज़ की औरतमिली है साला साहेब को !:
उन्होंने बोतल पकड़ीमेरे मम्मों पर दारु बिखेरी जो मेरी नाभि में चली गई।
ननदोई जी चाटते हुएनीचे आ रहे थे, मेरा बदनवासना से जलने लगा। ऐसे कामुक अंदाज़ कभी नहीं अपनाए, किसी ने मेरे बदन परऐसे खेल नहीं खेले थे, जब ननदोई जी ने नाभि से दारु चाटी, मैं कूल्हे उठानेलगी, इन्होंनेमेरी पैंटी खींच दी।
"हाय, कितनी प्यारी फ़ुद्दी है ! कितनी चिकनी कीहुई है मैडम आपने !"
मेरी फ़ुद्दी चाटनेलगे तो मुझे लगा कि मैं वैसे ही झड़ जाऊँगी, पर मैंने उनको नहीं रोका। उन्होंने मुझे उल्टालिटाया, मेरी पीठ परदारु डाल डाल कर चाटने लगे, मेरे चूतड़ों पर दारु टपका कर चाटने लगे। हाय ! मैं ऐसे मर्दके साथ पहली बार थी जो औरत को इतना सुख देता हो !
"दीदी ऐसा करने देती हैं क्या?"
"हाँ शुरु में मैंने उसको बहुत खिलाया है, अब उसके जिस्म का वोआकार नहीं रह गया जिसको सहलाया जाए, दारु डाल कर चाटी जाए !"
वो बोले- चल, ननदोईका लौड़ा चाट !
मैं भी पूरी रंडीबनकर दिखाना चाहती थी, उनकी आँखों में देखते हुए मैं नीचे से उनके लौड़े को जुबां सेचाटते हुए सुपारे तक ले गई, वहाँ से रोल करके लौड़ा चूसा।
"हाय मेरी रानी ! मजे से चाट-चूम ! जो तेरादिल आये कर इसके साथ !"
उनका नौ इंची लौड़ासलामी दे दे कर मेरे अरमान जगा रहा था, मैं खूब खेल रही थी।
फ़िर बोले- चल एक साथकरते हैं !
69 में आकर मैं उनके लौड़े को चूसने लगी, वो मेरी फ़ुद्दी कोचाटने लगे, उंगली सेफैला कर दाने को रगड़ते हुए बोले- वैसे काफी ठुकवाई है तुमने !
"आपको किसने कह दिया, जनाब?"
"तेरी फ़ुद्दी बोल रही है ! बहुत बड़े शिकारीहैं शोभा हम ! साले साब ने नहीं घुसया क्या?"
"इनका बहुत पतला और बहुत छोटा है, राजा । घुसाया तो सहीलेकिन मुझे पूरी रात जलाया भी था।"
कुछ देर एक दूजे केअंगों को चूमते रहे,फिर मेरी टांगें उठवा दी और अपने मोटे लौड़े को धीरे धीरे से प्रवेशकरवाने लगे, मुझे सच मेंदर्द हुई, काफी मोटाथा।
"कैसी लगी फ़ुद्दी? ढीली या सही?"
"बिलकुल सही है, रानी !" उन्होंने कस करझटका दिया और मेरी सिसकारी निकल गई- आ आऊ ऊऊऊउ छ्हह्ह्ह !
वे जोर जोर से पेलनेलगे, मैं सिसकसिसक कर उनका पूरा साथ दे रही थी। ननदोई जी ने मेरी टांगों को हाथों मेंपकड़ लिया और वार पर वार करने लगे, इससे पूरा लौड़ा घुसता था, कभी घोड़ी बनाते, कभी टांगें उठा कर आगेसे मेरी लेते रहे।
बहुत देर में जबउनका निकलने वाला था तो कहा- [font='Times New Roman', serif]“[/font]कहाँनिकालूँ रानी? बच्चा जल्दीकरना है तो अन्दर निकाल देता हूँ, मेरे स्पर्म बहुत मजबूत हैं।[font='Times New Roman', serif]“[/font]
"रुको मत ! जो करना है, अंदर करो, मेरे राजा! हाय, जोर जोर सेकरो ना !"
उन्होंने अपना पूरा पानीमेरे अंदर निकाला,  मैंने उनकागीला लौड़ा चाट चाट कर पूरा साफ़ कर डाला।
"आज मजा आया या कल रात को आया था?"
"वो रात मैं भूलना चाहती हूँ वैसी झल्लातीमुझे आज तक किसी ने नहीं छोड़ा था।"
"बहुत मस्त माल है तू, शोभा ! पसंद आई बहुत !तेरे चूतड़ बहुत नर्म हैं !" मेरी गाण्ड पर थपकी लगाते हुए बोले।
एकदम से दोनों चूतड़फैला कर गांड देखने लगे- इसमें भी डलवाया हैकभी?”
"आपके इरादे खराब हैं! आप उन्हें देख कर आओपहले!"
वो जल्दी से उन्हेंदेख कर आये, बोले- [font='Times New Roman', serif]“[/font]सो रहा है, अब तू घोड़ी बन जा![font='Times New Roman', serif]”[/font]
"मैं कोठे पर बैठी हूँ क्या जो आप यह सब करवारहे हैं?" लेकिन मैंनेउनका कहना माना।
उन्होंने मेरे चूतडों को फैला करगांड पर पिच्च से  थूका, और ऊँगली घुसाते हुएपूछा - दी तो है ना पहले?”
"हां, पर उसका आप जितना बड़ा नहीं था!"
"चल एक एक पैग लगाते हैं, फिर तुझे दर्द नहींहोगा।"
"बहुत कड़वी है।"
"खींच जा बस !"
मुझे काफी नशा होनेलगा था, बियर कीबोतल पकड़ कर मुझे घोड़ी बना दिया, पहले गाण्ड पर बियर डाल कर चाटी, खाली बोतल को गाण्डमें घुसाने लगे।
"यह क्या?"
"इससे तेरी ढीली करूँगा !"
उनका ज़ालिम लौड़ा फिरसे खड़ा था, उसको फ़ुद्दीमें घुसाते हुए बियर की बोतल को गांड में देने लगे।
"हाय ! प्लीज़ ! यह क्या?"
फिर बोतल निकाल पूरीताक़त से लौड़ा मेरी गांड में घुसा दिया और लगे पेलने।
"हाय, फट गई मेरी ! मत मारो, प्लीज़!"
लेकिन उन्होंने पूरीमर्दानगी मेरी गांड पर उतार दी नशा ना किया होता तोमर ही जाती मैं !उन्होंने इतनी ताक़त से गांड मारी कि मेरे बदन का कचूमरनिकाल दियाअंग अंग ढीला कर दिया!
फिर मैं सुबह तीनबजे पति के कमरे में गई और वहीं लेट गई, थकान से कब नींद आई पता नहीं चला। सुबह आठ बजे पति ने मुझेजगाया।
"मैं आपसे नाराज़ हूँ, उन्होंने इतना महंगाहोटल बुक किया और आपको याद भी नहीं होगा कि कितनी मुश्किल से आपको लिटाया था मैंने !"
"आगे से कम पियूँगा।"
हम घर लौट आये, आँखों में नशा औरनींद दोनों थी।  ननदें मज़ाक करने लगी- लगता है पूरीरात को सोये नहीं?
ननदोई जी खुद दोपहरको लौटे, रात हुई, काफी मेहमान आ चुकेथे, सोने के इंतजामकिये थे। रात को सभीनाचने लगे, डी.जे. लगवालिया था। पति देवपैलेस चले गए थे पूरा कामकाज देखने के लिए, हलवाइयो की निगरानी भी करनी थी।
सभी थक कर चूर होगये, खाना-वानाखाया, जिसको जहाँजगह मिली, वहीं सोगया। नीचे बिस्तरलगाए थे, सासू माँ नेमुझे कमरे में भेज दिया, बोली- वहीं जाकर सो जा ! सभी सो गए, मुझे भी नींद आ गई,  काफी रात कोमैंने अपने ऊपर किसी को महसूस किया।
बोले- मैं हूँ।
"आप फिर?" ननदोई जी ही थे।
"आज भी?"
"तेरी चूत की आदत लग गई है, रानी। जरा सलवार कानाडा खोल."
"आप भी ना? कोई आ गया तो?"
[font='Times New Roman', serif]“[/font]सभी थक करसो गए हैं, हम नाचेनहीं थे इसलिए थके नहीं। अब  थकने आये हैं!"
वो लौड़ा लेकरसिरहाने की तरफ सरक गए जिससे उनका नाग देवता मेरे होंठों से टकरा गया।  मैंने झट सेमुँह में लेकर चुप्पे मारे और सलवार उतार कर बोली- आज खुलकर खेलने का वक्त नहीं है !
"हाँ, हाँ !"
मैंने टाँगें उठाईऔर जल्दी से घुसवा लिया. उन्होंने भी दस मिनट दनादन शाट मार कर पानी निकाल दिया।

जब में उनको कमरे सेबाहर निकालने गई, मुझे लगा किकिसी ने देखा ज़रूर है, यह नहीं पता चला कि कौन था। वो तो चले गए, मैं घबरा गई।
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