Post Thread Post Reply
Thread Rating:
  • 0 Votes - 0 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
घर का दूध
11-03-2012, 07:11 AM
Post: #11
RE: घर का दूध
मैंने पूछा "अरे ये क्यों ले आयी हो मंजू रानी, चोदने में तो इसकी जरूरत नहीं पड़ती, तेरी चूत तो वैसे ही गीली रहती है हरदम" तो शीशी सिरहाने रखकर बोली "तुम ही तो पीछे पड़े थे मेरे सैंया कि गांड मरवा ले मंजू. तो आज मार लेना. इसलिये तेल ले आई हूं, बिना तेल के आपका यह मुस्टंडा अंदर नहीं जायेगा, मेरी गांड बिलकुल कुंआरी है बाबूजी, फ़ट जायेगी, जरा रहम करके मारना"

मेरा सोचना सही था, मंजू बाई अब तक अपनी चूत मुझसे चुसवाने का सपना देख रही थी और जैसे ही उसे यकीन हुआ, उसने गांड मरवाने की तैयारी कर ली. उसकी कोरी गांड मारने के खयाल से मेरा लंड उछलने लगा. पर मैं अब सच में पहले उसकी चूत चूसना चाहता था.

"गांड तो आज तेरी मार ही लूंगा मेरी रानी पर पहले जरा ये देसी खालिस घी तो और चटवा. साला सिर्फ़ चख कर ही लंड ऐसा उछल रहा है, जरा चार पांच चम्मच पी के भी तो देखूं."

"तो यहीं चाट लो ना बिस्तर पर" टांगें खोल कर लेटती हुई मंजू बोली.

"अरे नहीं, यहां बैठ. चूत पूरी खोल, तब तो मुंह मार पाऊंगा ठीक से" मैंने उसे कुरसी में बिठाया और उसकी टांगें उठाकर कुरसी के हाथों में फ़ंसा दीं. अब उसकी टांगें पूरी फ़ैली हुई थीं और बुर एकदम खुली हुई थी. मैं उसके सामने नीचे जमीन पर बैठ गया और उसकी सांवली जांघों को चूमने लगा.

मंजू अब मस्ती में पागल से हो गयी थी. उसने खुद ही अपनी उंगली से अपनी झांटें बाजू में कीं और दूसरे हाथ की उंगली से चूत के पपोटे खोल कर लाल लाल गीला छेद मुझे दिखाया. "चूस लो मेरे बाबूजी जन्नत के इस दरवाजे को, चाट लो मेरा माल मेरे राजा, मां कसम, बहुत मसालेदार रज है मेरी, आप चाटोगे तो फ़िर और कुछ नहीं भायेगा. मैं तो कब से सपना देख रही हूं अपने सैंया को अपना ये अमरित चखाने का, पर आपने मौका ही नहीं दिया, मैं जानती थी कि तुमको अच्छा लगेगा, अब तो रोज इतनी अमरित पिलाऊंगी कि तुम्हें इसकी लत पड़ जायेगी"

मैं जीभ निकालकर उसकी चूत पर धीरे धीरे फ़िराने लगा. उस चिपचिपे पानी का स्वाद कुछ ऐसा मादक था कि मैं कुत्ते जैसी पूरी जीभ निकालकर उसकी बुर को ऊपर से नीचे तक चाटने लगा. उसके घुंघराले बाल मेरी जीभ में लग रहे थे. चूत के ऊपर के कोने में जरा सा लाल लाल कड़ा हीरे जैसा उसका क्लिट था. उसपर से मेरी जीभ जाती तो वह किलकने लगती.

उसका रस ठीक से पीने के लिये मैंने अपने मुंह में उसकी चूत भर ली और आम जैसा चूसने लगा. चम्मच चम्मच रस मेरे मुंह में आने लगा. "हाय बाबूजी, कितना मस्त चूसते हो मेरी चूत, आज मैं सब पा गयी मेरे राजा, कब से मैंने मन्नत मांगी थी कि आप को मेरे बुर का माल पिलाऊं, मैं जानती थी कि आप पसंद करोगे" कराहते हुए वह बोली. अब वह अपनी कमर हिला हिला कर आगे पीछे होते हुई मेरे मुंह से अपने आप को चुदवाने की कोशिश कर रही थी. वो दो मिनिट में झड़ गयी और उसकी बुर मेरे मुंह में चिपचिपा पानी फेकने लगी. मैं घूंट घूंट वह घी निगलने लगा.

"बाई, सच में तेरी चूत का पानी बड़ा जायकेदार है, एकदम शहद है, फ़ालतू मैंने इतने दिन गंवाये, रोज मुंह लगाता तो कितना घी मेरे पेट में जाता" मैंने जीभ से चटखारे लेते हुए कहा.

"तो क्या हुआ बाबूजी, अब से रोज पिया करो, अब तो मैं सुबह शाम, दिन रात आपको पेट भर कर अपना शहद चटवाऊंगी." मंजू मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाकर बोली.

मैं चूत चाटता ही रहा. उसे तीन बार और झड़ाया. वह भी मस्ती में मेरे सिर को कस कर अपनी बुर पर दबाये मेरे मुंह पर धक्के लगाती रही. झड़ झड़ कर वो थक गयी पर मैं नहीं रुका. वो पूरी लस्त होकर कुरसी में पीछे लुढ़क गयी थी. अब जब भी मेरी जीभ उसके क्लिट पर जाती, तो उसका बदन कांप उठता. उसे सहन नहीं हो रहा था.

"छोड़ो अब बाबूजी, मार डालोगे क्या? मेरी बुर दुखने लगी, तुमने तो उसे निचोड़ डाला, अब किरपा करो मुझपर, छोड़ दो मुझे, पांव पड़ती हूं तुम्हारे" वो मेरे सिर को हटाने की कोशिश करते हुए बोली.


Celebrity Gossip - Beautiful HD Celebrity Pictures Daily
Bollywood HD Wallpapers
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
11-03-2012, 07:11 AM
Post: #12
RE: घर का दूध
"अभी तो सिर्फ़ चाटा और चूसा है रानी, जीभ से कहां चोदा है. अब जरा जीभ से भी करवा लो" कहकर मैंने उसके हाथ पकड़कर अपने सिर से अलग किये और उसकी चूत में जीभ घुसेड़ दी. चूत में जीभ अंदर बाहर करता हुआ उसके क्लिट को मैं अब जीभ से रेती की तरह घिस रहा था. उसके तड़पने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था. वो अब सिसक सिसक कर इधर उधर हाथ पैर फ़ेंक कर तड़प रही थी. जब आखिर वो रोने लगी तब मैंने उसे छोड़ा. उठकर उसे खींचकर उठाता हुआ बोला "चलो बाई, तेरा शहद लगता है खतम हो गया. अब गांड मराने को तैयार हो जाओ. कैसे मराओगी, खड़े खड़े या लेट कर?"

वह बेचारी कुछ नहीं बोली. झड़ झड़ कर इतनी थक गयी थी कि उससे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था. उसकी हालत देख कर मैंने उसे बांहों में उठाया और उसके लस्त शरीर को पट पलंग पर पटक कर उसपर चढ़ बैठा.

मैंने जल्दी जल्दी अपना लंड तेल से चिकना किया और फ़िर उसकी गांड में तेल लगाने लगा. एकदम सकरा और छोटा छेद था, वो सच बोल रही थी कि अब तक गांड में कभी किसी ने लंड नहीं डाला था. मैंने पहले एक और फ़िर दो उंगली डाल दीं. वो दर्द से सिसक कर उठी. "धीरे बाबूजी, दुखता है ना, दया करो थोड़ी आपकी इस नौकरानी पर, हौले हौले उंगली करो"

मैं तैश में था. सीधा उसकी गांड का छेद दो उंगलियों से खोलकर बोतल लगायी और चार पांच चम्मच तेल अंदर भर दिया. फ़िर दो उंगली अंदर बाहर करने लगा "चुप रहो बाई, चूत चुसवा कर लुत्फ़ लिया ना तूने? अब जब मैं लंड से गांड फ़ाड़ूंगा तो देखना कितना मजा आता है. तेरी चूत के घी ने मेरे लंड को मस्त किया है, अब उसकी मस्ती तेरी गांड से ही उतरेगी".

मंजू कराहते हुए बोली. "बाबूजी, गांड मार लो, मैंने तो खुद आपको ये चढ़ावे में दे दी है, आपने मुझे इतना सुख दिया मेरी चूत चूस कर, ये अब आपकी है, जैसे चाहो मजा कर लो, बस जरा धीरे मारो मेरे राजा, फ़ाड़ दोगे तो तुम्हें ही कल से मजा नहीं आयेगा"

अब तक मैं भी पूरा फ़नफ़ना गया था. उठ कर मैं मंजू की कमर के दोनों ओर घुटने टेक कर बैठा और गुदा पर सुपाड़ा जमा कर अंदर पेल दिया. उसके सकरे छेद में जाने में तकलीफ़ हो रही थी इसलिये मैंने हाथों से पकड़कर उसके चूतड़ फ़ैलाये और फ़िर कस कर सुपाड़ा अंदर डाल दिया. पक्क से वह अंदर गया और मंजू दबी आवाज में "उई ऽ मां, मर गयी रे" चीख कर थरथराने लगी. पर बेचारी ऐसा नहीं बोली कि बाबूजी गांड नहीं मराऊंगी. मुझे रोकने की भी उसने कोई कोशिश नहीं की.

मैं रुक गया. ऐसा लग रहा था जैसे सुपाड़े को किसी ने कस के मुठ्ठी में पकड़ा हो. थोड़ी देर बाद मैंने फ़िर पेलना शुरू किया. इंच इंच करके लंड मंजू बाई की गांड में धंसता गया. जब बहुत दुखता तो बेचारी सिसक कर हल्के से चीख देती और मैं रुक जाता.

आखिर जब जड़ तक लंड अंदर गया तो मैंने उसके कूल्हे पकड़ लिये और लंड धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा. उसकी गांड का छल्ला मेरे लंड की जड़ को कस कर पकड़ था, जैसे किसीने अंगूठी पहना दी हो. उसके कूल्हे पकड़कर मैंने उसकी गांड मारना शुरू कर दी. पहले धीरे धीरे मारी. गांड में इतना तेल था कि लंड मस्त फ़च फ़च करता हुआ सटक रहा था. वह अब लगातार कराह रही थी. जब उसका सिसकना थोड़ा कम हुआ तो मैंने उसके बदन को बाहों में भींच लिया और उसपर लेट कर उसके मम्मे पकड़कर दबाते हुए कस के उसकी गांड मारने लगा.

मैंने उस रात बिना किसी रहम के मंजू की गांड मारी, ऐसे मारी जैसे रंडी को पैसे देकर रात भर को खरीदा हो और फ़िर उसे कूट कर पैसा वसूल कर रहा होऊं. मैं इतना उत्तेजित था कि अगर वह रोकने की कोशिश करती तो उसका मुंह बंद करके जबरदस्ती उसकी मारता. उसकी चूचियां भी मै बेरहमी से मसल रहा था, जैसे आम का रस निकालने को पिलपिला करते हैं. पर वह बेचारी सब सह रही थी. आखिर में तो मैंने ऐसे धक्के लगाये कि वह दर्द से बिलबिलाने लगी. मैं झड़ कर उसके बदन पर लस्त सो गया. क्या मजा आया था. ऐसा लगता था कि अभी अभी किसी पर बलात्कार किया हो.

Celebrity Gossip - Beautiful HD Celebrity Pictures Daily
Bollywood HD Wallpapers
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
11-03-2012, 07:11 AM
Post: #13
RE: घर का दूध
जब लंड उसकी गांड से निकाल कर उसे पलटा तो बेचारी की आंखों में दर्द से आंसू आ गये थे, बहुत दुखा था उसे पर वह बोली कुछ नहीं क्योंकि उसीने खुद मुझे उसकी गांड मारने की इजाजत दी थी. उसका चुम्मा लेकर मैं बाजू में हुआ तो वह उठकर बाथरूम चली गयी. उससे चला भी नहीं जा रहा था, पैर फ़ुतराकर लंगड़ाकर चल रही थी. जब वापस आयी तो मैंने उसे बांहों में ले लिया. मुझसे लिपटते हुए बोली "बाबूजी, आपने तो सच में मेरी पूरी मार ली. आप को कैसा लगा? इतने दिन पड़े थे पीछे कि बाई, मरवा लो"

मैंने उस चूम कर कहा "मंजू बाई, तेरी कोरी कोरी गांड तो लाजवाब है, आज तक कैसे बच गयी? वो भी तेरे जैसी चुदैल औरत की गांड ! लगता है मेरे ही नसीब में थी. ऐसी मस्त टाइट थी जैसे किसीने घूंसे में लंड पकड़ लिया हो"

मुझसे लिपट कर मंजू बोली "मैंने बचा के रखी बाबू आप के लिये. मुझे मालूम था आप आओगे. अब आप कभी भी मारो, मैं मना नहीं करूंगी. मेरी चूत में मुंह लगाकर आपने तो मुझे अपना गुलाम बना लिया. बस ऐसे ही मेरी चूत चूसा करो मेरे राजा बाबू, फ़िर चाहे जितनी बार मारो मेरी गांड. आप को अंदाजा नहीं है कि आपको अपनी बुर का पानी पिलाकर मुझे कितना सुकून मिलता है. पर बहुत दुखता है बाबू, आपका लंड है कि मूसल और आप ने आज गांड की धज्जियां उड़ा दीं, बहुत बेदर्दी से मारी मेरी गांड! पर तुमको सौ खून माफ़ हैं मेरे राजा, आखिर मेरे सैंया हो"

"चलो तो एक बार और मरवा लो" मैंने कहा.

"अब नहीं बाबूजी, आज माफ़ करो, मैं मर जाऊंगी, गांड बहुत खुद गयी है" मंजू मिन्नत करते हुए बोली.

"चूत भी चूसूंगा" मैंने कहा.

"वो भी मत चूसो बाबूजी. आप ने तो उसको खा डाला आज"

"फ़िर क्या करूं? ये लंड देख" मैंने अपना फ़िर से तन्नाता लौड़ा उसके हाथ में देकर पूछा.

"तो चोद लो ना बाबूजी, कितना भी चोदो"

मैंने उसे मन भरके चोदा, एक बार सोने के पहले और फ़िर तड़के और फ़िर ही उसको जाने दिया.

इसके बाद मैं उसकी गांड हफ़्ते में दो बार मारने लगा, उससे ज्यादा नहीं, बेचारी को बहुत दुखता था. मैं भी मार मार कर उसकी कोरी टाइट गांड ढीली नहीं करना चाहता था. उसका दर्द कम करने को गांड में लंड घुसेड़ने के बाद मैं उसे गोद में बिठा लेता और उसकी बुर को उंगली से चोदकर उसे मजा देता, दो तीन बार उसे झड़ाकर फ़िर उसकी मारता. गांड मारने के बाद खूब उसकी बुर चूसता, उसे मजा देने को और उसका दर्द कम करने को. गांड चिकना करने को मैंने मख्खन का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था, वह भी फ़्रिज़ में रखा ठंडा मख्खन. उससे उसे काफ़ी राहत मिलती थी.

वैसे उसकी चूत के पानी का चस्का मुझे ऐसा लगा, कि जब मौका मिले, मैं उसकी चूत चूसने लगा. एक दो बार तो जब वह खाना बना रही थी, या टेबल पर बैठ कर सब्जी काट रही थी, मैंने उसकी साड़ी उठाकर उसकी बुर चूस ली. उसको हर तरह से चोदने और चूसने की मुझे अब ऐसी आदत लग गयी थी कि मैं अक्सर सोचता था कि मंजू नहीं होती तो मैं क्या करता.

********************************************

यही सब सोचते मैं पड़ा था. मंजू ने अपने मम्मों पर हुए जखमों पर क्रीम लगाते हुए मुझे फ़िर उलाहना दिया "क्यों चबाते हो मेरी चूंची बाबूजी ऐसे बेरहमी से. पिछले दो तीन दिन से ज्यादा ही काटने लगे हो मुझे"

मैंने उसकी बुर को सहलाते हुए कहा "बाई, अब तुम मुझे इतनी अच्छी लगती हो कि तेरे बदन का सारा रस मैं पीना चाहता हूं. तेरी चूत का अमरित तो बस तीन चार चम्मच निकलता है, मेरा पेट नहीं भरता. तेरी चूंचियां इतनी सुंदर हैं, लगता है इनमें दूध होता तो पेट भर पी लेता. अब दूध नहीं निकलता तो जोश में काटने का मन होता है"

वह हंसते हुए बोली "अब इस उमर में कहां मुझे दूध छूटेगा बाबूजी. दूध छूटता है नौजवान छोकरियों को जो अभी अभी मां बनी हैं."

फ़िर वह उठकर कपड़े पहनने लगी. कुछ सोच रही थी. अचानक मुझसे पूछ बैठी "बाबूजी, आप को सच में औरत का दूध पीना है या ऐसे ही मुफ़्त बतिया रहे हो"

मैंने उसे भरोसा दिलाया कि अगर उसके जैसे रसीली मतवाली औरत हो तो जरूर उसका दूध पीने में मुझे मजा आयेगा.

Celebrity Gossip - Beautiful HD Celebrity Pictures Daily
Bollywood HD Wallpapers
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
11-03-2012, 07:11 AM
Post: #14
RE: घर का दूध
"कोई इंतजाम करती हूं बाबूजी. पर मुझे खुश रखा करो. और मेरी चूचियों को दांत से काटना बंद कर दो. मेरी बुर को मस्त रखोगे तो कोई न कोई रास्ता निकल आयेगा तुमको दूध पिलाने का" उसने हुकुम दिया.

उसे खुश रखने को अब मैंने रोज उसकी बुर पूजा शुरू कर दी. जब मौका मिलता, उसकी चूत चाटने में लग जाता. मैंने एक वी सी आर भी खरीद लिया और उसे कुछ ब्लू फ़िल्म दिखाईं. कैसेट लगाकर मैं उसे सोफ़े में बिठा देता और खुद उसकी साड़ी ऊपर कर के उसकी बुर चूसने में लग जाता. एक घंटे की कैसेट खतम होते होते वह मस्ती से पागल होने को आ जाती. मेरा सिर पकड़कर अपनी चूत पर दबा कर मेरे सिर को जांघों में पकड़कर वह फ़िल्म देखते हुए ऐसी झड़ती कि एकाध घंटे किसी काम की नहीं रहती.

रात को कभी कभी मैं उसे अपने मुंह पर बिठा लेता. उछल उछल कर वो ऐसे मेरे मुंह और जीभ को चोदती कि जैसे घोड़े की सवारी कर रही हो. कभी मैं उससे सिक्स्टी नाइन कर लेता और उसकी बुर चूस कर अपने लंड की मलाई उसे खिलाता.

एक रात मैंने उस बहुत मीठा सताया, बुर चुसवाने की उसकी सारी इच्छा पूरा कर दी. दो पिक्चर दिखाई, दो घंटे उसकी चूत चूसी. वह झड़ झड़ कर निहाल हो गयी. पर फ़िर उसे छोड़ने के बजाय उसे पकड़कर बिस्तर पर ले गया और उसके हाथ पैर बांध दिये. वह घबरा गयी, चायद सोच रही होगी कि मुश्कें बांध कर उसकी गांड मारूंगा पर मैंने उसे प्यार से समझाया कि कोई ऐसी वैसी बात नहीं कर रहा हूं. फ़िर उसकी चूत से मुंह लगाकर चूसने लगा. एक दो बार और झड़ कर बेचारी पस्त हो गयी. अब उसकी निचोड़ी हुई बुर पर मेरी जीभ लाते ही उसके शरीर में बिजली सी दौड़ जाती. उसके क्लिट को मैं जीभ से रगड़ता तो वह तड़पने लगती, उसे अब यह सहन नहीं हो रहा था.

मैंने उसे नहीं छोड़ा. लगातार चूसता रहा. वह रोते हुए मिन्नतें करने लगी. पर मैंने अपना मुंह उसकी बुर से नहीं हटाया. आखिर दो घंटे बाद अचानक उसका शरीर ढीला हो गया और वह बेहोश हो गयी. मैंने फ़िर भी नहीं छोड़ा. आज मुझपर भी भूत सा सवार था, मैं उसकी बुर की बूंद बूंद निचोड़ लेना चाहता था. मन भर कर चूसने के बाद मैंने उसी बेहोशी में उसकी बुर में लंड डाला और हचक हचक कर दो तीन बार चोद डाला. वह बेह्सोह पड़ी रही, बस जब चोदता तो बेहोशी में ही ’अं’ ’अं’ करने लगती. दूसरी सुबह वह उठ भी नहीं पायी, बिस्तर में ही पड़ी रही. मैंने उसे आराम करने दिया, घर का काम भी नहीं करने दिया.

शाम तक वह संभली. उसकी हालत देखकर मुझे लगा कि शायद ज्यादती हो गयी, अब बिचक न जाये. वह दिन भर चुप चुप थी. मुझे लगा कि शायद रात को भी न आये पर रात को मेरी बांहों में खुद आ कर समा गयी. कुछ बोल नहीं रही थी. मैंने मनाया कि बाई, बुरा मान गयी क्या तो बोली "तुमने तो मुझे निहाल कर दिया बाबूजी, कहीं का नहीं छोड़ा, मेरी हालत खराब कर दी. पर इतना सुख दिया कल रात तुमने मुझे, मैंने जनम में नहीं पाया. मैं मान गयी बाबूजी आप मेरे बदन के कितने प्यासे हो."

"बस तुम खुश हो बाई तो मैं भी खुश हूं, मेरा ये पठ्ठा भी खुश है"

"अब और खुश कर दूंगी आप को, बस जरा सा इंतजार करो" मंजू बोली.

अगले शनिवार को वह सुबह ही गायब हो गयी. मेरे लिये सुबह सुबह खाना बना कर गयी थी. जाते जाते बोली कि शाम को आयेगी. मैंने पूछा कि कहां जा रही हो पर कुछ बोली नहीं, बस मुस्करा दी. दोपहर की नींद के बाद मैं जब उठा तो मंजू वापस आ गयी थी. कमरे में साफ़ सफ़ाई कर रही थी. मुझे जगा देख कर चाय बना लाई. मैंने उसकी कमर में हाथ डाल कर पास खींचा और जोर से चूम लिया. "क्यों मंजू बाई, आज सुबह से चम्मच भर शहद भी नहीं मिला. कहां गायब हो गयी थी?"

वह मुझसे छूट कर मुझे आंख मारते हुए धीरे से बोली. "आप ही के काम से गयी थी बाबूजी. जरा देखो, क्या माल लाई हूं तुम्हारे लिये!"

Celebrity Gossip - Beautiful HD Celebrity Pictures Daily
Bollywood HD Wallpapers
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
11-03-2012, 07:14 AM
Post: #15
RE: घर का दूध
मैंने देखा तो दरवाजे में एक जवान लड़की खड़ी थी. थोड़ी शरमा जरूर रही थी पर टक लगाकर मेरी और मंजू के बीच की चूमा चाटी देख रही थी. मैंने सकपका कर मंजू को छोड़ा और उससे पूछा कि ये कौन है. वैसे मंजू और उस लड़की की सूरत इतनी मिलती थी कि मैं समझ गया गया था. मंजू बोली "घबराओ मत बाबूजी, ये गीता है, मेरी बेटी. बीस साल की है, दो साल पहले शादी की है इसकी. अब एक बच्चा भी है"

मैं गीता को बड़े इंटरेस्ट से घूर रहा था. गीता मंजू जैसी ही सांवली थी पर उससे ज्यादा खूबसूरत थी. शायद उसकी जवानी की वजह से ऐसी लग रही थी. मंजू से थोड़ी नाटी थी और उसका बदन भी मंजू से ज्यादा भरा पूरा था. एकदम मांसल और गोल मटोल, शायद मां बनने की वजह से होगा.

उस लड़की का कोई अंग एकदम मन में भरता था तो वह था उसकी विशाल छाती. उसका आंचल ढला हुआ था; शायद उसने जान बूझकर भी गिराया हो. उसकी चोली इतनी तंग थी कि छातियां उसमें से बाहर आने को कर रही थीं. चोली के पतले कपड़े में से उसके नारियल जैसे मम्मे और उनके सिरे पर जामुन जैसे निपलों का आकार दिख रहा था. निपलों पर उसकी चोली थोड़ी गीली भी थी.

मेरा लंड खड़ा होने लगा. मुझे थोड़ा अटपटा लगा पर मैं क्या करता, उस छोकरी की मस्त जवानी थी ही ऐसी. मंजू आगे बोली. "उसे मैंने सब बता दिया है बाबूजी, इसलिये आराम से रहो, कुछ छुपाने की जरूरत नहीं है, उसे मालूम है कि आप उसकी अम्मा के यार हो. आप के बारे में बताया तो खुश हो गयी मेरी बेटी, बोली कि चलो अम्मा, तेरी प्यास बुझाने वाला भी आखिर कोई मिला तेरे को"

गीता तो देखकर मेरा अब तक तन्ना कर पूरा खड़ा हो गया था. मंजू हंसने लगी "मेरी बिटिया भा गयी बाबूजी आप को. कहो तो इसे भी एक दो महने के लिये यहीं रख लूं. आप की सेवा करेगी. हां इसकी तनखा अलग होगी"

उस मतवाली छोकरी के लिये मैं कुछ भी करने को तैयार था. "बिलकुल रख लो बाई, और तनखा की चिंता मत करो"

"असल बात तो आप समझे ही नहीं बाबूजी, गीता पिछले साल ही मां बनी है. बहुत दूध आता है उसको, बड़ी तकलीफ़ भी होती है बेचारी को. बच्चा एक साल को हो गया, अब दूध नहीं पीता, पर इसका दूध बंद नहीं होता. चूंची सूज कर दुखने लगती है, दबा दबा कर दूध निकालता पड़ता है. जब आप मेरा दूध पीने की बात बोले तो मुझे खयाल आया, क्यों न गीता को गांव से बुला लाऊं, उसकी भी तकलीफ़ दूर हो जायेगी और आपके मन की बात भी हो जायेगी? बोलो, जमता है बाबूजी?"

मैंने गीता की चूंची घूरते हुए कहा "पर इसका मर्द और बच्चा?"

"उसकी फ़िकर आप मत करो, इसका आदमी काम से छह महने को शहर गया है, इसलिये मैंने इसे मायके बुला लिया. इसकी सास अपने पोते के बिना नहीं रह सकती, बहुत लगाव है, इसलिये उसे वहीं छोड़ दिया है, ये अकेली है इधर"

याने मेरी लाइन एकदम क्लीयर थी. मैं गीता का जोबन देखने लगा. लगता था कि पकड़ कर खा जाऊं, चढ़ कर मसल डालूं उसके मतवाले रूप को. गीता भी मस्त हो गयी थी, मेरे खड़े लंड को देखते हुए धीरे धीरे खड़े खड़े अपनी जांघें रगड़ रही थी.

Celebrity Gossip - Beautiful HD Celebrity Pictures Daily
Bollywood HD Wallpapers
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
11-03-2012, 07:14 AM
Post: #16
RE: घर का दूध
सिर्फ़ दूध पीने की बात हुई है बाबूजी, ये समझ लो." मंजू ने मुझे उलाहना दिया और फ़िर आंख मार दी. बड़ी बदमाश थी, मुझे और तंग करने को उकसा रही थी. फ़िर गीता को मीठी फ़टकार लगायी "और सुन री छिनाल लड़की. मेरी इजाजत के बिना इस लंड को हाथ भी नहीं लगाना, ये सिर्फ़ तेरी अम्मा के हक का है"

"अम्मा ऽ, ये क्या? मेरे को भी मजा करने दे ना ऽ कितना मतवाला लौड़ा है, तू बता रही थी तो भरोसा नहीं था मेरा पर ये तो और खूबसूरत निकला" गीता मचल कर बोली. उसकी नजरें मेरे लंड पर गड़ी हुई थीं. बड़ी चालू चीज़ थी, जरा भी नहीं शरमा रही थी, बल्कि चुदाने को मरी जा रही थी.

"बदमाश कहीं की, तू सुधरेगी नहीं, मैंने कहा ना कि अभी बाबूजी सिर्फ़ मेरे हैं. अभी चोली निकाल और फ़टाफ़ट बाबूजी को दूध पिला." मंजू ने अपनी बेटी को डांटते हुए कहा. फ़िर मुझे बोली "अब गांव की छोरी है बाबूजी, गरम गरम है, इसकी बात का बुरा नहीं मानना"

मंजू अब मेरे लंड को पजामे के बाहर निकाल कर प्यार से मुठिया रही थी. फ़िर उसने झुक कर उसे चूमना शुरू कर दिया. उधर गीता ने अपना ब्लाउज़ निकाल दिया. उसकी पपीते जैसे मोटी मोटी सांवली चूचियां अब नंगी थीं. वे एकदम फ़ूली फ़ूली थीं जैसे अंदर कुछ भरा हो. वजन से वे लटक रही थें.

एक स्तन को हाथ में उठाकर सहारा देते हुए गीता बोली "अम्मा देख ना, कैसे भर गये हैं मम्मे मेरे, आज सुबह से खाली नहीं हुए, बहुत दुखते हैं"

"अरे तो टाइम क्यों बरबाद कर रही है. आ बैठ बाबूजी के पास और जल्दी पिला उनको. भूखे होंगे बेचारे" मंजू ने उसका हाथ पकड़कर खींचा और पलंग पर मेरे पास बिठा दिया. मुझे बोली "बाबूजी, मैं रोज इसका दूध इसकी चूंचियां दबा दबा कर निकाल देती हूं कि इसकी तकलीफ़ कम हो. आज नहीं निकाला, सोचा, आप जो हो, राह तक रहे हो कि औरत का दूध पीने मिले. मेरी बच्ची से ज्यादा दूध वाली आप को कहां मिलेगी!"

मैं सिरहाने से टिक कर बैठा था. गीता मेरे पास सरकी, उसकी काली आंखों में मस्ती झलक रही थी. उसके मम्मे मेरे सामने थे. निपलों के चारों ओर तश्तरी जैसे बड़े भूरे अरोला थे. पास से वे मोटे मोटे लटके स्तन और रसीले लग रहे थे. अब मुझसे नहीं रहा गया और झुक कर मैंने एक काला जामुन मुंह में ले लिया और चूसने लगा.

मीठा कुनकुना दूध मेरे मुंह में भर गया. मेरी उस अवस्था में मुझे वह अमृत जैसा लग रहा था. मैंने दोनों हाथों में उसकी चूंची पकड़ी और चूसने लगा जैसे कि बड़े नारियल का पानी पी रहा होऊं. लगता था मैं फ़िर छोटा हो गया हूं. आंखें बंद करके मैं स्तनपान करने लगा. औरत का दूध, वह भी ऐसी बला की खूबसूरत और सेक्सी गांव की छोरी का! मैं सीधा स्वर्ग पहुंच गया.

उधर मंजू ने मेरा लंड मुंह में ले लिया. अपनी कमर उछाल कर मैं उसका मुंह चोदने की कोशिश करने लगा. वह महा उस्ताद थी, बिना मुझे झड़ाये प्यार से मेरा लंड चूसती रही. अब तक गीता भी गरमा गयी थी. मेरा सिर उसने कस कर अपनी छाती पर भींच लिया जिससे मैं छूट न पाऊं और उसका निपल मुंह से न निकालूं. उसे क्या मालूम था कि उसकी उस मतवाली चूंची को छोड़ दूं ऐसा मूरख मैं नहीं था. उसका मम्मा दबा दबा कर उसे दुहते हुए मैं दूध पीने लगा.

अब वह प्यार से मेरे बाल चूम रही थी. सुख की सिसकारियां भरती हुई बोली "अम्मा, बाबूजी की क्या जवानी है, देख क्या मस्त चूस रहे हैं मेरी चूंची, एकदम भूखे बच्चे जैसे पी रहे हैं. और उनका यह लंड तो देख अम्मा, कितनी जोर से खड़ा है. अम्मा, मुझे भी चूसने दे ना!"

मंजू ने मेरा लंड मुंह से निकाल कर कहा "मैंने कहा ना कि उसकी बात मत कर, मुझे बाबूजी से भी पूछना पड़ेगा, क्या ऐसे ही चढ़ जायेगी उनपर? कुछ तो शरम कर. आज नहीं, कल देखेंगे, वो भी अगर बाबूजी हां कहें तो! पता नहीं तेरा दूध उन्हें पसंद आया है कि नहीं" वैसे गीता के दूध के बारे में मैं क्या सोचता हूं, इसका पता उसे मेरे उछलते लंड से ही लग गया होगा.

आखिर गीता का स्तन खाली हो गया. उसे दबा दबा कर मैंने पूरा दूध निचोड़ लिया. फ़िर भी उसके उस मोटे जामुन से निपल को मुंह से निकालने का मन नहीं हो रहा था. पर मैंने देखा कि उसके दूसरे निपल से अब दूध टपकने लगा था. शायद ज्यादा भर गया था. मैंने उसे मुंह में लिया और उसकी दूसरी चूंची दुह कर पीने लगा. गीता खुशी से चहक उठी. "अम्मा, ये तो दूसरा मम्मा भी खाली कर रहे हैं. मुझे लगा था कि एक से इनका मन भर जायेगा."

"तो पीने दे ना पगली, उन्हें भूख लगी होगी. अच्छा भी लगा होगा तेरा दूध. अब बकबक मत कर, मुझे बाबूजी का लौड़ा चूसने दे ठीक से, बस मलाई फ़ेकने ही वाला है अब" कहकर मंजू फ़िर शुरू हो गयी

जब दूसरी चूंची भी मैंने खाली कर दी तब मंजू ने मेरा लंड जड़ तक निगल कर अपने गले में ले लिया और ऐसे चूसा कि मैं झड़ गया. मुझे दूध पिलवा कर उस बिल्ली ने मेरी मलाई निकाल ली थी. मैं लस्त होकर पीछे लुढ़क गया पर गीता अब भी मेरा सिर अपनी छाती पर भींच कर अपनी चूंची मेरे मुंह में ठूंसती हुई वैसे ही बैठी थी.

Celebrity Gossip - Beautiful HD Celebrity Pictures Daily
Bollywood HD Wallpapers
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
11-03-2012, 07:14 AM
Post: #17
RE: घर का दूध
मंजू ने उठ कर उसको खींच कर अलग किया. "अरी छोड़ ना, क्या रात भर बैठेगी ऐसे?"

गीता मेरी ओर देख कर बोली "बाबूजी, पसंद आया दूध?" वह जरा टेंशन में थी कि मैं क्या कहता हूं.

मैंने खींच कर उसका गाल चूम लिया. "बिलकुल अमरित था गीता रानी, रोज पिलाओगी ना?"

वह थोड़ी शरमा गयी पर मुझे आंख मार कर हंसने लगी. मैंने मंजू से पूछा "कितना दूध निकलता है इसके थनों से रोज बाई? आज तो मेरा ही पेट भर गया, इसका बच्चा कैसे पीता था इतना दूध"

मंजू बोली "अभी ज्यादा था बाबूजी, कल से बेचारी की चूंची खाली नहीं की थी ना. नहीं तो करीब इसका आधा निकलता है एक बार में. वैसे हर चार घंटे में पिला सकती है ये." मैंने हिसाब लगाया. मैंने कम से कम पाव डेढ़ पाव दूध जरूर पिया था. अगर दिन में चार बार यह आधा पाव दूध भी दे तो आधा पौना लिटर दूध होता था दिन का.

दिन में दो तीन पाव देने वाली उस मस्त दो पैर की गाय को देख कर मैं बहक गया. शायद चुद कर सेर भर भी देने लगे! मंजू को पूछा "बोलो बाई, कितनी तनखा लेगी तेरी बेटी?"

वो गीता की ओर देख कर बोली "पांच सौ रुपये दे देना बाबूजी. आप हजार वैसे ही देते हो, आप से ज्यादा नहीं लूंगी."

मैंने कहा कि हजार रुपये दूंगा गीता को. गीता तुनक कर बोली "पर काहे को बाबूजी, पांच सौ ही बहुत है, और मैं भी तो आपके इस लाख रुपये के लंड से चुदवाऊंगी रोज . हजार ज्यादा है, मैं कोई कमाने थोड़े ही आई हूं आपके पास."

मैंने गीता की चूंची प्यार से दबा कर कहा "मेरी रानी, ज्यादा नहीं दे रहा हूं, पांचसौ तुम्हारे काम के, और पांच सौ दूध के. अब कम से कम मेरे लिये तो बाहर से दूध खरीदने की जरूरत नहीं है. वैसे तुम्हारा ये दूध तो हजारों रुपये में भी सस्ता है" गीता शरमा गयी पर मंजू हंसने लगी "बिलकुल ठीक है बाबूजी. बीस रुपये लिटर दूध मिलता है, उस हिसाब से महने भर में बीस पचीस लिटर दूध तो मिल ही जायेगा आपको. चल गीता, अब बाबूजी को आराम करने दे"

गीता ने एक दो बार और जिद की पर मंजू उसे जबरदस्ती हाथ पकड़कर खींच कर बाहर लेगयी. फ़िर दोनों मिलकत खाना बनाने में लग गयीं.

Celebrity Gossip - Beautiful HD Celebrity Pictures Daily
Bollywood HD Wallpapers
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
11-03-2012, 07:15 AM
Post: #18
RE: घर का दूध
उस रात मंजू ने मुझे अपनी बेटी नहीं चोदने दी. बस उस रात को एक बार और गीता का दूध मुझे पिलाया. दूध पिलाते पिलाते गीता बार बार चुदाने की जिद कर रही थी पर मंजू अड़ी रही. "गीता बेटी, आज रात और सबर कर ले. कल शनिवार है, बाबूजी की छुट्टी है. कल सुबह दूध पिलाने आयेगी ना तू, उसके बाद कर लेना मजा"

"और अम्मा तू? तू भी चल ना!" गीता बोली.

"तू जा और सो जा, मैं दो घंटे में आती हूं" मंजू बोली.

"खुद मस्त चुदायेगी और जवान बेटी को प्यासी रखेगी. कैसी अम्मा है तू!" गीता चिढ़ कर बोली. "और उधर मैं अकेली क्या करूं?"

"जा मुठ्ठ मार ले, कुछ भी कर, मेरा दिमाग मत चाट" मंजू ने डांट कर कहा. आखिर गीता भुनभुनाते हुए चली गयी. उसके जाने के बाद मंजू बोली "बड़ी चुदैल है बाबूजी, आज तो मैंने टाल दिया पर कले से देखना, आपको ये नहीं छोड़ेगी"

"आखिर तुम्हारी बेटी है मंजू बाई. अब तुम साड़ी निकालो और यहां आओ" मैंने कहा.

गीता के जाने के बाद मैंने मंजू को ऐसा चोदा कि वह एकदम खुश हो गयी. "आज तो बाबूजी, बहुत मस्त चोद रहे हो हचक हचक कर. लगता है मेरी बेटी बहुत पसंद आयी है, उसी की याद आ रही है, है ना?" कमर उचकाते हुए वो बोली.

"जो भी समझ लो मंजू बाई पर आज तुम्हारी बुर भी एकदम गीली है, बड़ा मजा आ रहा है चोदने में"

मंजू ने बस एक बार चुदवाया और फ़िर चली गयी. मैंने रोका तो बोली "अब आराम भी कर लो बाबूजी, कल से आपको डबल काम करना है"

सुबह जब मंजू चाय लेकर आयी तो साथ में गीता भी थी. दोनों सुबह सुबह नहा कर आयी थीं, बाल अब भी गीले थे. मंजू तो मादरजात नंगी थी जैसी उसकी आदत थी, गीता ने भी बस एक गीली साड़ी ओढ़ रखी थी जिसमें से उसका जोबन झलक रहा था.

"ये क्या, सुबह सुबह पूजा वूजा करने निकली हो क्या दोनों?" मैंने मजाक किया.

गीता बोली "हां बाबूजी, आज आपके लंड की पूजा करूंगी, देखो फ़ूल भी लाई हूं" सच में वह एक डलिया में फ़ूल और पूजा का सामान लिये थी. बड़े प्यार से उसने मेरे लंड पर एक छोटा टीका लगाया और उसे एक मोगरे की छोटी माला पहना दी. ऊपर से मेरे लंड पर कुछ फ़ूल डाले और फ़िर उसे पकड़कर अपने हाथों में लेकर उसपर उन मुलायम फ़ूलों को रगड़ने लगी. दबाते दबाते झुक कर अचानक उसने मेरे लंड को चूम लिया.

मैं कुछ कहता इसके पहले मंजू हंसती हुई मेरे पास आकर बैठ गयी. मेरा जोर का चुंबन लेकर अपनी चूंची मेरी छाती पर रगड़ते हुए बोली. "अरे ये तो बावरी है, कल से आपके गोरे मतवाले लंड को देखकर पागल हो गयी है. बाबूजी, जल्दी से चाय पियो. मुझे भी आप से पूजा करवानी है अपनी चूत की. आप मेरी बुर की पूजा करो, गीता बेटी आपके लंड की पूजा करेगी अपने मुंह से."

मेरा कस कर खड़ा था. मैं चाय की चुस्की लेने गया तो देखा बिना दूध की चाय थी. मंजू को बोला कि दूध नहीं है तो वह बदमाश औरत दिखावे के लिये झूट मूट अपना माथा ठोक कर बोली " हाय, मैं भूल ही गयी, मैंने दूध वाले भैया को कल ही बता दिया कि अब दूध की जरूरत नहीं है हमारे बाबूजी को. अब क्या करें, चाय के बारे में तो मैंने सोचा ही नहीं. वैसे फ़िकर की बात नहीं है बाबूजी, अब तो घर का दूध है, ये दो पैरों वाली दो थनों की खूबसूरत गैया है ना यहां! ए गीता, इधर आ जल्दी"

गीता से मेरा लंड छोड़ा नहीं जा रहा था. बड़ी मुश्किल से उठी. पर जब मंजू ने कहा "चल अब तक वैसे ही साड़ी लपेटे बैठी है, चल नंगी हो और अपना दूध दे जल्दी, बाबूजी की चाय को" तो तपाक से उठ कर अपनी साड़ी छोड़ कर वह मेरे पास आ गयी. उसके देसी जोबन को मैं देखता रह गया. उसका बदन एकदम मांसल और गोल मटोल था, चूचियां तो बड़ी थीं ही, चूतड़ भी अच्छे खासे बड़े और चौड़े थे. गर्भावस्था में चढ़ा मांस अब तक उसके शरीर पर था. जांघें ये मोटी मोटी और पाव रोटी जैसी फ़ूली बुर, पूरी बालों से भरी हुई. मैं तो झड़ने को आ गया.

"जल्दी दूध डाल चाय में" मंजू ने उसे खींच कर कहा. गीता ने अपनी चूंची पकड़कर चाय के कप के ऊपर लाई और दबाकर उसमें से दूध निकालमे लगी. दूध की तेज पतली धार चाय में गिरने लगी. चाय सफ़ेद होने तक वह अपनी चूंची दुहती रही. फ़िर जाकर मेरी कमर के पास बैठ गयी और मेरे लंड को चाटने लगी.

मैंने किसी तरह चाय खतम की. स्वाद अलग था पर मेरी उस अवस्था में एकदम मस्त लग रहा था. मेरी सिर घूमने लगा. एक जवान लड़की के दूध की चाय पी रहा हूं और वही लड़की मेरा लंड चूस रही है और उसकी मां इस इंतजार में बैठी है कि कब मेरी चाय खतम हो और कब वह अपनी चूत मुझसे चुसवाये.

Celebrity Gossip - Beautiful HD Celebrity Pictures Daily
Bollywood HD Wallpapers
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
11-03-2012, 07:15 AM
Post: #19
RE: घर का दूध
मैंने चाय खतम करके मंजू को बांहों में खींचा और उसके मम्मे मसलते हुए उसका मुंह चूसने लगा. मेरी हालत देख कर मंजू ने कुछ देर मुझे चूमने दिया और फ़िर मुझे लिटाकर मेरे चेहरे पर चढ़ बैठी और अपनी चूत मेरे मुंह में दे दी. "बाबूजी, अब नखरा न करो, ऐसे नहीं छोड़ूंगी आपको, बुर का रस जरूर पिलाऊंगी, चलो जीभ निकालो, आज उसीको चोदूंगी" उधर गीता अब मेरे पूरे लंड को निगल कर गन्ने जैसा चूस रही थी.

इधर मंजू ने मुझे अपनी चूत का रस पिलाया और उधर उसकी बेटी ने मेरे लंड की मलाई निकाल ली. गीता के मुंह में मैं ऐसा झड़ा कि लगता था बेहोश हो जाऊंगा. गीता ने मेरा पूरा वीर्य निगला और फ़िर मुस्कराते हुए आकर मां के पास बैठ गयी.

मंजू अब भी मुझपर चढ़ी मेरे होंठों पर अपनी बुर रगड़ रही थी. "क्यों बेटी. मिला प्रसाद, हो गयी तेरे मन की?"

"अम्मा, एकदम मलाई निकलती है बाबूजी के लंड से, क्या गाढ़ी है, तार तार टूटते हैं. तू तीन महने से खा रही है तभी तेरी ऐसी मस्त तबियत हो गयी है अम्मा. अब इसके बाद आधी मैं लूंगी हां!" गीता मंजू से लिपटकर बोली.

एक बार और मेरे मुंह में झड़ कर समाधान से सी सी करती मंजू उठी. "चल गीता, अब बाबूजी को दूध पिला दे. फ़िर आगे का काम करेंगे" गीता मेरे ऊपर झुकी और मुझे लिटाये लिटाये ही अपना दूध पिलाने लगी. रात के आराम के बाद फ़िर उसके मम्मे भर गये थे और उन्हें खाली करने में मुझे दस मिनिट लग गये. तब तक मंजू बाई की जादुई जीभ ने अपनी कमाल दिखाया और मेरे लंड को फ़िर तन्ना दिया.

गीता के दूध में ऐसा जादू था कि मेरा ऐसा खड़ा हुआ जैसे झड़ा ही न हो. उधर गीता मुझसे लिपट कर सहसा बोली "बाबूजी, आप को बाबूजी कहना अच्छा नहीं लगता, आपको भैया कहूं? आप बस मेरे से तीन चार साल तो बड़े हो"

मंजू मेरी ओर देख रही थी. मैंने गीता का गहरा चुंबन लेकर कहा "बिलकुल कहो गीता रानी. और मैं तुझे गीता बहन या बहना कहूंगा. पर ये तो बता तेरी अम्म्मा को क्या कहूं? इस हिसाब से तो उसे अम्मा कहना चाहिये"

मंजू मेरा लंड मुंह से निकाल कर मेरे पास आ कर बैठ गयी. उसकी आंखों में गहरी वासना थी. "हां, मुझे अम्मा कहो बाबूजी, मुझे बहुत अच्छा लगेगा. आप हो भी तो मेरे बेटे जैसी उमर के, और मैं आपको बेटा कहूंगी. समझूंगी मेरा बेटा मुझे चोद रहा है. आप कुछ भी कहो बाबूजी, बेटे या भाई से चुदाने में जो मजा है वो कहीं नहीं"

मुझे भी मजा आ रहा था. कल्पना कर रहा था कि सच में मंजू मेरी मां है और गीता बहन. उन नंगी चुदैलों के बारे में यह सोच कर लंड उछलने लगा. "अम्मा, तो आओ, अब कौन चुदेगा पहले, मेरी बहना या अम्मा?"

"अम्मा, अब मैं चोदूं भैया को?" उस लड़की ने अधीर होकर पूछा.

मंजू अब तैश में थी "बड़ी आई चोदने वाली, अपनी अम्मा को तो चुदने दे पहले अपने इस खूबसूरत बेटे से. तब तक तू ऐसा कर, उनको अपनी बुर चटा दे, वो भी तो देखें कि मेरी बेटी की बुर का क्या स्वाद है. तब तक मैं तेरे लिये उनका सोंटा गरम करती हूं" मुझे आंख मार कर मंजू बाई हंसने लगी. अब वह पूरी मस्ती में आ गयी थी.

Celebrity Gossip - Beautiful HD Celebrity Pictures Daily
Bollywood HD Wallpapers
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
11-03-2012, 07:15 AM
Post: #20
RE: घर का दूध
गीता फ़टाफ़ट मेरे मुंह पर चढ़ गयी. "ओ नालायक, बैठना मत अभी भैया के मुंह पर. जरा पहले उन्हें ठीक से दर्शन करा अपनी जवान गुलाबी चूत के" गीता घुटनों पर टिक गयी, उसकी चूत मेरे चेहरे के तीन चार इंच ऊपर थी. उसकी बुर मंजू बाई से ज्यादा गुदाज और मांसल थी. झांटें भी घनी थीं. चूत के गुलाबी पपोटे संतरे की फ़ांक जैसे मोटे थे और लाल छेद खुला हुआ था जिसमें से घी जैसा चिपचिपा पानी बह रहा था.

मैंने गीता की कमर पकड़कर नीचे खींचा और उस मिठाई को चाटने लगा. उधर मंजू ने मेरा लंड अपनी बुर में लिया और मुझपर चढ़ कर मुझे हौले हौले मजे लेकर चोदने लगी. अपनी बेटी का स्तनपान देखकर वह बहुत उत्तेजित हो गयी थी, उसकी चूत इतनी गीली थी कि आराम से मेरा लंड उसमें फ़िसल रहा था.

गीताके चूतड़ पकड़कर मैंने उसकी तपती बुर में मुंह छुपा दिया और जो भाग मुंह में आये वह आम जैसा चूसा लगा. उसका अनार का कड़ा दाना मैंने हल्के से दांतों में लिया और उसपर जीभ रगड़ने लगा. दो मिनिट में वह छोकरी सुख से सिसकती हुई झड़ गयी. मेरे मुंह में रस टपकने लगा. "अरी अम्मा, भैया कितना अच्छा करते हैं. मैं तो घंटे भर बुर चुसवाऊंगी आज़"

मैं एक अजीब मस्ती में डूबा हुआ उस जवान छोकरी की चूत चूस रहा था, वह ऊपर नीचे होती हुई मेरे सिर को पकड़कर मेरा मुंह चोद रही थी और उसकी वह अधेड़ अम्मा मुझपर चढ़ कर मेरे लंड को चोद रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे मैं साइकल हूं और ये दोनों आगे पीछे बैठकर मुझपर सवारी कर रही हैं. मैं सोचने लगा कि अगर यह स्वर्ग नहीं तो और क्या है.

गीता हल्के हल्के सीत्कारियां भरते मंजू से बोली "अम्मा, चूचियां कैसी हल्की हो गयी हैं, भैया ने पूरी खाली कर दीं चूस चूस कर. तू देख ना, अब जरा तन भी गयी हैं नहीं तो कैसे लटक रही थीं."

मेरी नाक और मुंह गीता की बुर में कैद थे पर आंखें बाहर होने से उसका शरीर दिख रहा था. मैंने देखा कि मंजू ने पीछे से अपनी बेटी के स्तन पकड़ लिये थे और प्यार से उन्हें सहला रही थी.

"सची बेटी, एकदम मुलायम हो गये हैं. चल मैं मालिश कर देती हूं, तुझे सुकून मिल जायेगा." मंजू बोली. मुझे दिखते हाथ अब गीता के स्तनों को दबाने और मसलने लगे. फ़िर मुझे चुम्मे की आवाज आयी. शायद मां ने लाड़ से अपनी बेटी को चूम लिया था. मेरे मन में अचानक खयाल आया कि ये मां बेटी का सादा प्रेम है या कुछ गड़बड़ है?

दस मिनिट बाद उन दोनों ने जगह बदल ली. मैं अब भी तन्नाया हुआ था और झड़ा नहीं थी. मंजूबाई एक बार झड़ चुकी थी और अपनी चूत का रस मुझे पिलाना चाहती थी. गीता दो तीन बार झड़ी जरूर थी पर चुदने के लिये मरी जा रही थी.

मंजू तो सीधे मेरे मुंह पर चढ़ कर मुझे बुर चुसवाने लगी. गीता ने पहले मेरे लंड का चुम्मा लिया, जीभ से चाटा और कुछ देर चूसा. फ़िर लंड को अपनी बुर में घुसेड़कर मेरे पेट पर बैठ गयी और चोदने लगी. मेरे मन में आया कि मेरे लंड को चूसते समय अपनी मां की बुर के पानी का स्वाद भी उसे आया होगा.

गीता की चूत मंजू से ज्यादा ढीली थी. शायद मां बनने के बाद अभी पूरी तरह टाइट नहीं हुई थी. पर थी वैसी ही मखमली और मुलायम. मंजू ने उसे हिदायत दी "जरा मन लगा कर मजे लेकर चोद बेटी नहीं तो भैया झड़ जायेंगे. अब मजा कर ले पूरा"

गीता ने अपनी मां की बात मानी पर सिर्फ़ कुछ मिनिट. फ़िर वह ऐसी गरम हुई कि उछल उछल कर मुझे पूरे जोर से चोदने लगी. उसने मुझे ऐसे चोदा कि पांच मिनिट में खुद तो झड़ी ही, मुझे भी झड़ा दिया. मंजू अभी और मस्ती करना चाहती थी इसलिये चिढ़ गयी. मेरे मुंह पर से उतरते हुए बोली "अरी ओ मूरख लड़की, हो गया काम तमाम? मैं कह रही थी सबर कर और मजा कर. मैं तो घंटों चोदती हूं बाबूजी को. अब उतर नीचे नालायक"

मंजू ने पहले मेरा लंड चाट कर साफ़ किया. फ़िर उंगली से गीता की बुर से बह रहे वीर्य को साफ़ करके उंगली चाटने लगी "ये तो परशाद है बेटी, एक बूंद भी नहीं खोना इसका. तू जरा टांगें खोल, ठीक से साफ़ कर देती हूं" उसने उंगली से बार बार गीता की बुर पोंछी और चाटी. फ़िर झुक कर गीता की जांघ पर बहे मेरे वीर्य को चाट कर साफ़ कर दिया. मेरे मन में फ़िर आया कि ये क्या चल रहा है मां बेटी में.

Celebrity Gossip - Beautiful HD Celebrity Pictures Daily
Bollywood HD Wallpapers
Find all posts by this user
Quote this message in a reply
Post Thread Post Reply




Online porn video at mobile phone


en koothi aripu sinne sunnistella ward nudeeve myles nudethuk lgakar ghusad diya porn videobeulah mcgillicutty nude picsemy jackson nudesaina nehwal asssadi kebad xnxx com xashifat picis brazil xxx fotoPorn film ke liye odishan kahna de charley uchea nakednude haylie duffolga fonda sexbus mai chutar dabye sex storybete ki biwi ki madak jawani ke pure maje liypenis.khatan.older.man.videosungli dal ke chik giradiya sex videosexstoris.nettinsel korey nudebianca bree nuderaveena tandon armpitsशराब में मदहोश हो कर चुद आईIncest Sex pariwar me adla badlimaa ki chut me ring dalwayipetticoat Pooja Karo bolne wali sex videoverona pooth nudeएक घाटे की चूत मती बीडीयोporn Karter kaha lite aurat ka doodhmummy ki adhmari chudai sex storypriyanka chopra exbiihelen skelton nip slipsriya puku dengadam elagrettell valdez nudeAaj Hum nahane Bani shampoo se Choda Tanijud taylor nudeDidi dwl chut dilbaya six khani hindimare chut khuli ho gainatalia oreiro nudemom sex hard mom ka cum bhar aya gaya mom pergent ho gaykelly labrock nudeapril bowlby nude fakesचूत में बाजा बजने लगाladki ko janbugh kar choda photoमैं औरजेठानी चुदीshriya fuckingamma nu kammaga denga sex storymare maa ne poletetion se chudai ki :insect storymelissa giraldo nudesuzanne shaw nudeamanda de cadenet nakedphd xxx video muthi kese marelucy mecklenburgh nudeamrita rao fuckamala paul nuderail ke patri ke kinare lund hilate ladke videaamna sharif boobsmehak chahal sexmaa or didi n fasa kr muje apna slave bnayamummy bani chacha ki randi storiesbollywood celebs nip slipporn purata dukaosara paxton nip slipladko ne ladki cut par thuk lagakar codabarmunda heroin ladki puri nagi chut gand fotoammi ki chudai ka jatkaysaxi raninude haylie duff shemale police ka lauda ki vdo xxxmiriam giovanelli nudelinda cardellini upskirt