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चाची के चुंचुक
01-20-2014, 06:54 PM
Post: #1
Wank चाची के चुंचुक
आज मैं अपना एक सुखद अनुभव लिख रहा हूँ, जो मेरी चाची ने लगभग चार वर्ष पहले मुझे दिया था और जिसका स्मरण आज भी मुझे रोमांचित कर देता है! घटना का विवरण करने से पहले मैं आप सबको अपने और चाची के बारे में कुछ बताना चाहूँगा! मेरा नाम महेश हैं पर घर में अब भी मुझे सब मुन्ना ही कहते हैं। मैं अलीगढ़ का रहने वाला हूँ  और आजकल मैं कानपुर में आई आई टी सेएम-टैक कर रहा हूँ। अब मेरी उम्र चौबीस साल है, कद पांच फुट ग्यारह इंच है, अच्छा खासा व्यक्तित्व है, मेरा लंड आठ इंच लम्बा है और दो इंच मोटा है। मेरी चाची का नाम अमिता है, अब उनकी उमर चौंतीस वर्ष, कद पाँच फुट पाँच इंच, वक्ष का फ़ुलाव छत्तीस है,उसके आकर्षक शरीर की आकृति का माप 36-26-38 है। चाची का रंग गोरा है, गाल गुलाबी और चेहरा अण्डाकार है, मोहक आँखें हिरणी जैसी हैं, होंठ गुलाब की पंखुड़ियों जैसे है और काले लम्बे घने बाल उसके नितम्बों तक आते हैं, जब वह मटक मटक कर चलती है तो अच्छे अच्छों को पागल कर देती है।
चाचा भी छत्तीस वर्ष के हैं और वे कानपुर में कपड़ों के एक बहुत ही बड़े थोक व्यापारी हैं। वे सुबह से लेकर रात तक व्यापार में ही व्यस्त रहते हैं और अक्सर उसी के कारण उन्हें कानपुर से बाहर भी जाना पड़ता है।
जब मेरे साथ यह घटना घटी थी तब मैं कानपुर आई आई टी में बी-टैक की पढ़ाई कर रहा था और कानपुर में ही अपने चाचा-चाची के पास पिछले छह माह से रह रहा था। उस समय मेरे चाचा-चाची की शादी को तीन वर्ष हो चुके थे और अभी तक उनके घर कोई संतान नहीं हुई थी। चाचा व्यापार के कारण जब भी बाहर जाते थे तब चाची को सारा दिन घर पर अकेले ही बिताना पड़ता था और कोई संतान ना होने के कारण उन्हें जीवन बहुत ही नीरस लगता था।
जब चाची को मेरी माँ से मेरे कानपुर आई आई टी में प्रवेश मिलने का समाचार मिला तो उन्होंने मेरी माँ और पापा को कह दिया कि वे मुझे हॉस्टल में नहीं रहने देंगी और अपने पास ही रखेंगी। चाची की सोच थी कि मेरा उनके साथ रहने से उसका अकेलापन कम हो जाएगा और जीवन का खालीपन भी दूर हो जायेगा क्योंकि उसका कुछ समय तो मेरे साथ और मेरी ज़रूरतें पूरी करने में व्यतीत हो जायेगा।
क्योंकि चाचा और चाची के पास पैसे की तो कोई कमी नहीं थी इसलिए वे दोनों खुद ही हमारे घर आकर मुझे अलीगढ़ से कानपुर लेकर आये !
चाचा का घर दो मंजिल का है, जिसमें नीचे एक बैठक-कक्षभोजन-कक्ष, रसोई, दो अतिथि-कक्ष और दो छोटे कमरे हैं।चाचा का ड्राईवर और चाची की नौकरानी, दोनों पति पत्नी थे, इन दो छोटे कमरों में ही रहते थे। चाची ने मेरे रहने की व्यवस्था ऊपर की मंजिल में अपने शयन-कक्ष के सामने वाले शयन-कक्ष में कर दी थी और मेरी पढ़ाई में कोई भी बाधा नहीं आये इसके लिए उसने मेरी सुख सुविधा की सब वस्तुओं का समायोजन उस कमरे में कर दिया था।
चाचा और चाची के लाड़ प्यार में और पढ़ाई में व्यस्त रहने के कारण छह माह कैसे बीत गए मुझे मालूम ही नहीं पड़ा ! पहले सेमिस्टर की परीक्षा समाप्त होने के बाद छुट्टियों में मैं माँ और पापा के पास रहने के लिए चला गया था।
मुझे कानपुर से अलीगढ़ आये अभी एक सप्ताह ही हुआ था कि माँ के पास चाची का फोन आया कि वह मुझे उसके पास भेज दें क्योंकि चाचा को व्यापार के सम्बंध में एक सप्ताह के लिए कानपुर से बाहर जा रहे थे। चाची के आग्रह पर माँ तथा पापा ने मुझे तुरन्त वापिस कानपुर भेज दिया।
मेरे कानपुरपहुँचने के एक दिन के बाद चाचा बाहर चले गए और चाची ने ड्राईवर और नौकरानी को भी चार दिनों की छुट्टी दे दी थी, इसलिए चाचा के जाने के अगले दिन सुबहड्राईवर भी नौकरानी को लेकर अपने गाँव चला गया। अब घर में सिर्फ हम दो व्यक्ति ही रह गए थे, एक चाची औरदूसरा मैं!
चाची सारा दिन घरका काम करती रहती और मैं ज़्यादा समय अपने कमरे में कम्प्यूटर पर ही व्यतीत करता, लेकिन बीच मेंथोड़े समय के लिए घर की सफाई में चाची का हाथ ज़रूर बंटा देता था। उस रात को खाना खाकर जब सोने का समय हुआ तब चाची ने घर के सब दरवाज़े आदि बंद किए और मुझे बताया कि क्योंकि घर खाली था इसलिए वे तो नीचे अतिथि-कक्ष में ही सोयेंगी।
चाची ने मुझे कहाकि मैं भी अपनी इच्छा के अनुसार अगर चाहूँ तो नीचे अतिथि-कक्ष में उसके साथ सो सकता हूँ या फिर ऊपर अपने शयन-कक्ष में सो जाऊँ!
जब मैंने चाची कोबताया कि मैं भी नीचे ही सो जाऊँगा, तब चाची कहा- फिर तो दोनों बड़े वालेअतिथि-कक्ष में ही सो जाते हैं!
चाची ऊपर गई, नाईट गाउन पहन करनीचे आ गई और उस कमरे को खोल दिया। चाची के कहने पर मैंने भी ऊपर अपने कमरे में जाकर कपड़े बदले और सब कुछ बंद करके नीचे सोने के लिए उस कमरे में आ गया।
जब अतिथि-कक्ष मेंघुसा तो इतने बड़े कमरे को देख कर अचम्भित हो गया ! उस कमरे में एक बहुत ही बढ़िया काश्मीरी गलीचा बिछा हुआ था और उसी के बीच में सात फुट लम्बा और सात फुट चौड़ा बड़ा डबल-बैड रखा था जिस पर बहुत ही नरम गद्दे वाला बिस्तर बिछा हुआ था!
बेड की बाएँ ओर एकबहुत ही कीमती सोफा सेट रखा हुआ था जिसके सामने एक शीशे के टॉप वाली मेज रखी हुई थी, बेड केदाएँ ओर दीवार में एक अलमारी थी और उसके साथ ही किनारे पर एक ड्रेसिंग टेबल रखी हुई थी! बैड के सामने दीवार पर एक शो-केस था, जिस के बीच में एक चालीस इंच का एलसीडी टीवीलगा हुआ था।
मैंने देखा कि चाचीबैड के बाएँ तरफ लेट गई थी और मुझे इशारा करके दाईं तरफ सोने को कहा।
मैंने चाची से कहा-मैं सोफे पर सो जाऊँगा।
तो उन्होंने कहा-बैड काफ़ी चौड़ा है,इसलिए दोनों के सोने में कोई दिक्कत नहीं होगी!
उसकी यह बात सुन करमैं दाईं तरफ की खाली जगह पर लेट गया और कुछ देर के बाद मुझे नींद आ गई।
 
अगले दिन सुबह मेरीनींद खुली तो मैंने चाची को बैड पर नहीं पाया, मैं उठ कर कमरे सेनिकला और ऊपर चला गया। उसी समय चाची अपने कमरे से नहा कर बाहर निकल रही थी, उसके गीले बाल खुलेहुए थे, उनमें सेपानी की बूँदें नीचे गिर रही थीं !वे एक अप्सरा जैसी लग रही थी, मैं उन्हें देखताही रह गया!
मुझे देख कर चाचीमुस्करा कर मेरे पास आई और मुझे अपने आलिंगन में लेकर मेरे गालों को चूम लिया और कहा- जल्दी से फ्रेश हो कर नाश्ते के लिए नीचे आ जाओ!
चाची की उस हरकत ने मुझे चकित कर दिया था क्योंकि आज से पहले चाची ने कभी भी ऐसा व्यवहार नहीं किया था। चाची के नर्म गुंदाज शरीर के स्पर्श से मैं रोमांचित हो उठा था, उसके ठोस स्तनों कामेरी छाती पर जो दबाव पड़ा, उसे मैं बहुत देर तक महसूस करता रहा।
चाची ने गाउन पहना तो हुआ था लेकिन उनके शरीर के स्पर्श से यही लगा था कि उन्होंने गाउन के नीचे कुछ नहीं पहना हुआ था। उनके शरीर की महक ने मुझे पागल सा कर दिया था और यह सोच कर ही कि वे गाउन के अंदर नग्न थी मेरा लिंग तन गया था।
मैं जल्दी ही फ्रेश होकर नाश्ते के लिए नीचे आ गया।
जब मैं भोजन-कक्ष में गया तो चाची को वहाँ मेरी प्रतीक्षा करते हुए देखा तो एक बार फिर उसे गले लगाने की इच्छा हुई। यह जानने के लिए कि चाची ने गाउन के नीचे कुछ पहना था या नहीं, मैं उसे टकटकी लगाकर देखता रहा!
जब चाची ने मुझे नाश्ता परोसने के लिए थोड़ा झुकी तब उसके गाउन का गला नीचे लटक गया और मुझे इनका वक्षस्थल दिखाई दिया! यह पुष्टि हो गई कि चाची ने गाउन के नीचे कुछ भी नहीं पहना था। उनके गोल गोरे स्तन और उन पर उठे हुए चुंचुक मेरा मन ललचा रहे थे! मेरी उत्तेजना से बुरा हाल था लेकिन किसी तरह अपने आप को सम्भाल कर मैंने नाश्ता किया। फिर मैं भाग कर अपने बाथरूम में गया और चाची की कल्पना करते हुए मैंने अपने हाथ से अपनी उत्तेजना को शांत किया!
उस दिन चाची के यौवन को देख कर मेरे मन में उनके प्रति वासना जागृत हो गई। उनको पूर्णतया नग्न देखने की इच्छा बलवती हो गई और उनके साथ रतिक्रिया की कल्पना भी मन में बार-बार होने लगी!
शाम को मैं चाची को लेकर बाजार गया, वहाँ उन्होंने घर के लिए खरीदारी की तथा बाजार में ही एक आहार-गृह में हमने रात का खाना खाया। देर रात को जब घर आये तो चाची थके होने व कपड़े बदलने का बहाना बना कर अपने कमरे में चली गई तथा मुझे घर के दरवाज़े आदि बंद करने के लिए कह दिया।
मैं चाची के कहे अनुसार सब निपटा कर अपने कमरे में जाने से पहले बाजार से लाए हुए सामान में से अपना सामान निकलने लगा तो एक लिफाफे में मुझे कामसूत्र कंडोम का एक पैकेट मिले ! मुझे उसे देख कर पहले तो कुछ हैरानी हुई लेकिन फिर यह सोच कर कि चाची-चाचा प्रयोग करते होंगे तो ले आई होंगी। मैंने वे पैकेट वैसे ही रख दिए और अपना सामान लेकर अपने कमरे में कपड़े बदलने चला गया। कमरे में जब मैं कपड़े बदल रहा था तब मेरे मस्तिष्क में यह ख्याल आया कि चाचा और चाची की तो कोई संतान नहीं है तो फिर ये कंडोम इस्तमाल क्यों करते हैं ! जब मुझे कोई उत्तर समझ में नहीं मिला तो मैंने अपने सिर को झटका और कपड़े बदल कर नीचे अतिथि-कक्ष में सोने के लिए चला गया।
जब मैं अतिथि-कक्षमें पहुँचा तो देखा कि चाची बैड के बाएँ ओर लेटी हुई है और उसके गाउन के ऊपर के और नीचे के दो दो बटन खुले हुए थे, गाउन में से उनके गोरे वक्ष के बीच की गहरी घाटी तथा उसकी चिकनी टांगें साफ दिखाई दे रही थी!
चाची को इस अवस्थामें लेटे देख कर पहले तो मैं थोड़ा झिझका लेकिन फिर मैं बैड के दाएँ ओर जा कर लेट गया। मेरे लेटते ही चाची ने मेरी ओर करवट कर ली और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे थोड़ा अपने नज़दीक खींच लिया, वे बाजार में की हुई खरीदारी के बारे में बातें करने लगीं !
बातों-बातों मेंचाची ने एक टांग ऊंची करके खड़ी कर ली जिससे उसका गाउन उस पर से सरक गया और उसकी गोरे रंग की जांघें दिखने लगी। यह देख कर मेरा ध्यान बातों से हट कर उन गोरी, चिकनी और सुडौलजाँघों की ओर चला गया। चाची क्या बोले जा रही रही थी, मुझे कुछ भी सुनाईनहीं दे रहा था!
मैं उन चिकनी जाँघों को देखने में इतना मस्त था कि जब चाची ने मेरी बाजू पकड़ कर जोर झिंझोड़ कर पूछा, 'कहाँ गुम हो गए?'
तब मेरे मुख से आकस्मात निकल गया, 'आपकी जाँघों में!' लेकिन जैसे ही मुझे होश आया तो मैंने  चाची की ओर देखा और अपनी कही बात के लिए उससे क्षमा मांगने लगा।
 
मेरी बात सुन चाची हँसने लगी और बोली- क्षमा मांगने की कोई जरूरत नहीं। तुम गुम नहीं हो सकते पर मेरी जांघों के बीच में तुम्हारा कुछ गुम हो सकता है!
मैंने आशा-मिश्रित आश्चर्य से चाची को देखा तो उन्होंने मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों के बीच में पकड़ लिया और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख कर एक लंबा सा चुम्बन किया ! कुछ क्षणों के बाद चाची अलग हुई और अपने गाऊन को थोड़ा ठीक करती हुई बोली- मेनका का ऐसा दृश्य देख कर तो विश्वामित्र भी विचलित हो गए थे पर मैं कोई मेनका नहीं हूं!
यह सुन कर मेरी आशा बढ़ गई।  मैंने उन्हें खुश करने के लिए कहा – चाची, आपकी जांघें किसी भी तरह मेनका से कम नहीं हैं।
चाची ने खुश हो कर मुझे अपने पास खींच लिया और मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने गाउन के अंदर अपने स्तन पर रख कर कहा – और यह?
जवाब में मैंने उनके स्तन को दबाया तो वे ऊईईई... करती हुई बोली - इतनी जोर से नहीं, मुन्ना! थोडे हलके हाथ से!
मैंने उनका आज्ञापालन किया और  जैसे वे कहती, वैसे ही मैं करनेलगा।
मैंने अपना हाथ दूसरे स्तन पर ले जाने की कोशिश की तो चाची ने गाउन के नाभि तक के सारे बटन खोल दिए जिससे मुझे चाची के दूसरे स्तन को पकड़ने में भी कोई बाधा ना हो। मैंने चाची के दोनों स्तनों को पकड़ लिया और सहज रूप से दबाने लगा, तब चाची आनन्दितस्वर में आह्ह... आह्ह... करने लगी। फिर चाची ने मुझे स्तनों के ऊपर चुचूकों को उंगली और अंगूठे में लेकर मसलने को कहा। जब मैंने उसके कहे अनुसार चूचकों को मसला तो वे बहुत ही आनन्दित स्वर में आह्ह... आह... की आवाजें निकालने लगी और उन्होंने अपने गाउन के बाकी बचे हुए बटन भी खोल कर अपने बदन के सामने का हिस्सा बिल्कुल नंगा कर दिया।
चाची के गोल, गुदाज़ और उन्नत स्तन, उनका सपाट पेट, उनकी गोरी पतली कमर तथा नाभि और उनकी जाँघों के संधिस्थल पर उगे हुए काले बाल बहुत ही मनमोहक लग रहे थे! चाची के स्तन मसलते हुए जब उसके होंठों के चूसने लगा तो उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और मुझे चूसने दी। मुझे चाची का ऐसा करना बहुत ही अच्छा लगा और मैंने भी अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी, जिसे उसने झट सेग्रहण की और कस के चूसने लगी!
लगभग दस मिनट के बाद जब हम दोनों अलग हुए तब चाची ने बैठ कर अपना गाउन उतार दिया और मेरे भी सारे कपड़े उतारने में मेरी सहायता की तथा हम दोनों बिल्कुल नग्न हो कर एक दूसरे से लिपट कर लेट गए। फिर चाची ने मेरे सिर को पकड़ कर अपने स्तनों पर झुका दिया और एक चूचुक को मेरे मुँह में घुसा कर मुझे चूसने को कहा। मैंने चाची के कहे अनुसार उसकी दोनों चूचुकों को बारी बारी चूसने लगा तब चाची के मुख से बहुत ही आनन्दित स्वर में आहें निकलने लगी तथा वह मेरे गालों और माथे को बार बार चूमने लगी।
पाँच मिनट के बाद जब चाची को अपनी जाँघों पर मेरे उत्तेजित लिंग की चुभन का बोध हुआ तो उसने अपना दायाँ हाथ बढ़ा कर उसे पकड़ लिया और आहिस्ते आहिस्ते मसलने लगी। मैं भी अपने दाहिने हाथ से चाची की जाँघों के बीच के बालों को सहलाने लगा तो चाची ने दोनों टाँगें चौड़ी कर मेरे हाथ को अपनी भग  के होंठों पर व उनके अंदर फेरने की सहमति दे दी।
मैं चाची के स्तनों को चूसने और भग को सहलाने में व्यस्त था, जब चाची को उसके हाथ में मेरे लिंग पर पूर्व-रस का गीलापन महसूस हुआ तो वे उठ कर मेरे ऊपर इस तरह लेट गई कि उनका चेहरा मेर्री जाँघों पर था और उनकी जांघें मेरे चेहरे पर। वे मेरी इंद्री को अपने मुँह में डाल कर चूसने लगी। मैंने भी अपनी दो उँगलियाँ उनकी योनी में डाल दी और उन्हें अंदर बाहर करने लगा। वह बेचैन होने लगी और मुझे वैसा करने से मना किया। लेकिन मैं उनके भगोष्ठों को खोल कर अपनी जीभ को उनकी योनी के अंदर बाहर करने लगा और बीच बीच में उसके भग-शिश्न को भी अपनी जीभ से सहला देता था। जब भी मैं उसके भग-शिश्न को सहलाता तो वह इंद्री मुँह में होने के कारण दबे स्वर में ऊंहूंहूंहूं... ऊंहूंहूंहूं... ऊंहूंहूंहूं... की आवाजें ही निकाल पाती !
लगभग दस मिनट की इसक्रिया के बाद चाची ने इंद्री को मुख से बाहर निकाल कर बहुत जोर के स्वर में आहह... आह्हह्ह... आह... करती हुई मेरे सिर को अपनी जाघों में जकड़ लिया तथा अपने नितम्बों को ऊपर उठा कर मेरे मुँह में अपने पानी की फुहार छोड़ दी। मैं उस स्वादिष्ट पानी से अपनी प्यास बुझाने में मस्त रहा और चाची की भग को चाटता तथा चूसता रहा।
दो मिनट के बाद जब चाची की फुहार दुबारा निकली तब उन्होंने मुझसे कहा कि अब यह बहुत हो गया। उन्होंने मुझे अपनी जाँघों के बीच आने को कहा। मैं समझ गया कि अब मेरी बहु-प्रतीक्षित कामना पूरी होने वाली है। मैं उसकी बात को मानते हुए उनकी टांगों के बीच में जैसे ही बैठा तभी चाची ने टांगों को कुछ मोड़ लिया और कामसूत्र का पैकेट मुझे थमा दिया। मैं समझ गया। मैंने एक कंडोम निकाल कर थोड़ी कोशिश के बाद उसे अपने शिश्न पर चढ़ा लिया।
तब चाची ने अपनी टाँगें पूरी तरह चौड़ी कर दी और अपने हाथों से अपनी भग  का मुँह खोल कर मुझे उसमें लिंग प्रविष्ट करने का मूक निमंत्रण दिया। चाची की खुली हुई भग को देख कर मैं इतना उत्तेजित हो गयाकि मैंने शिश्न को उसके मुँह पर रख कर एक ज़ोरदार मारा। अंदर जाने की बजाय शिश्न फिसल कर उनके बालों पर पहुंच गया।
चाची बोली –ऐसे नहीं, मुन्ना! ध्यान से।
मैंने अपनी अनुभवहीनता के लिए चाची से क्षमा मांगते हुए कहा – आप मुझे बताती जाइए कि मुझे क्या और कैसे करना है।  

उनके कहने पर मैंने थोडा आगे झुक कर उनकी कमर को पकड़ लिया। चाची ने मेरे लिंग को अपने हाथ में ले कर सही स्थान पर रखा। उनकी आज्ञा मिलने पर  मैंने धीरे से एक धक्का लगाया । फिर वे निर्देश देती गयीं और मैं पालन करता गया। पांच-छः धक्कों के बाद पूरा लिंग योनी में था। योनी के पहले अनुभव से मैं रोमांचित था। उनकी भग की कसावट से मेरा लिंग फडकने लगा था। मन कर रहा था कि मैं भग पर टूट पडूं पर चाची ने मुझे खीच कर अपने ऊपर लिटा लिया और मुझे थोडा इंतज़ार करने को कहा। मेरा मन धक्के लगाने को मचल रहा था पर किसी तरह मैं थोड़ी देर के लिए उसी अवस्था में थमा रहा।  


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01-20-2014, 07:02 PM (This post was last modified: 01-20-2014 11:38 PM by Rocky X.)
Post: #2
Wank RE: चाची के चुंचुक
चाची ने अपने होंठ मेरे होंठों से मिला दिए और हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूमने और चूसने लगे। दो-तीन मिनट के बाद उनके नितंब धीरे धीरे उठने लगे। चाची बोली – अब समझ गए कि तुम्हे क्या और कैसे करना है?
मैं तो कब से इसी निर्देश का इंतज़ार कर रहा था! मैं धैर्य से सौम्य धक्के लगाने लगा। मेरा आनंद कल्पना से परे था। मुझे लगा कि चाची को भी यौन क्रीड़ा का आनन्द आ रहा था ! चाची आह... आह्ह.. ऊन्ह... ऊन्ह्ह्ह... करती हुई मेरे धक्कों का जवाब दे रही थीं
फिर वे मेरे चेहरे की ओर देखते हुए बोलीं – कैसी लग रही है, मुन्ना?
मैंने निसंकोच सच बोल दिया – यह तो मेरी कल्पना से कहीं ज्यादा अच्छी है
तुम्हारी मुट्ठी से भी अच्छी?
क्य...क्या?
क्यों? मैंने तो सुना है कि तुम्हारी उम्र के काफी लड़के मुट्ठी से ही काम चलाते हैं. तुम नहीं करते?
मैंने लज्जा से कहा – कभी कभी करना पड़ता है! पर इसके सामने मुट्ठी तो कुछ भी नहीं हैकिस के सामने?
मैंने शर्माते हुए कहा – आपकी योनी के सामने।
उन्होंने आश्चर्य से मेरी तरफ देखा और कहा, अच्छा? ... तो तुम लड़के इसे योनी कहते हो? तम्हारे चाचा तो इसे कुछ और कहते हैं।
क्या?”
वो मैं बाद में बताऊंगी। पहले तुम बताओ कि तुम लड़के जब आपस में बात करते हो तो इसे क्या कहते हो?
अब तो मैं बुरी तरह फंस गया था। बहुत शर्माते हुए मैंने कहा – मैं तो योनी या भग ही कहता हूं पर कुछ लड़के इसे च... चूत कहते हैं!
अरे, यही तो तुम्हारे चाचा भी बोलते हैं।”  
यह सुन कर मैं आश्चर्यचकित हो गया। मैं तो चाचा और चाची को बहुत सुसंस्कृत समझता था। मैंने सोचा भी न था कि चाची के सामने चाचा ऐसे बोलते होंगे। और चाची ने भी कोई आपत्ति नहीं की! इस बातचीत में मेरे धक्के रुक गए थे।
चाची बोलीं – क्या हुआ, मुन्ना? धक्के लगाओ ना। मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा था। तुम्हे मज़ा नहीं आ रहा?
अब मैंने फिर से मैथुन क्रिया पर ध्यान केंद्रित किया और लिंग को अंदर-बाहर करते हुए कहा - चाची, मज़ा तो मुझे भी आ रहा है पर मुझे अचम्भा हो रहा है कि आपको चाचा की ऐसी बातें बुरी नहीं लगती!
“अरे, अपनी चूत की तारीफ सुन कर किसे बुरा लगेगा? अगर मैं कहूँ कि तुम्हारा लंड तुम्हारे चाचा से ज्यादा तगड़ा है तो तुम्हे बुरा लगेगा?
चाची के मुंह से यह सुन कर तो मैं दंग रह गया। मैंने मन ही मन सोचा, मुन्ना, चाची तो खुल कर खेल रही है! तुझे उनकी भग ... नहीं ... चूत का मज़ा लेना है तो शर्म छोडनी पड़ेगी।”
चाची के आनन्द में वृद्धि के लिए मैंने धक्के थोड़े शक्तिशाली कर दिए और कहा – मुझे क्यों बुरा लगेगा? पर क्या आपको सचमुच चाचा से ज्यादा तगड़ा लग रहा है मेरा?
अपने नितंब उछालते हुए उन्होंने कहा – हां मुन्ना, तुम्हारा उनसे लंबा भी है और मोटा भी! अगर तुम प्रैक्टिस करते रहो तो कुछ दिनों में एक्सपर्ट बन जाओगे।
शर्म छोड़ने का इरादा तो मैं कर ही चूका था। मैंने कहा – चाची, मुझे प्रैक्टिस कौन करवाएगा? चाचा वापस आ जायेंगे आपको रोज उनसे चुदवाना पड़ेगा!
कमर उचकाते हुए चाची ने कहा – अरे, वे तो रात को चोदेंगे। दिन में तो मेरी चूत तुम्हारे लिए फ्री रहेगी।
यह सुन कर मैं बहुत उत्तेजित हो गया और पुरजोर धक्के मारने लगा। चाची भी इस रगड़ाई का आनन्द ले रही थी! लगभग दस मिनट तक मैं उन्हें इसी तरह कस कर चोदता रहा। अचानक चाची ने एक बहुत ही जोर का उछाल मारा और उनका बदन अकड़ कर मचलने लगा! उनकी सिसकियों और आहों के साथ ही उनकी चूत में बहुत ज़बरदस्त संकुचन होने लगा! इस से मैं भी उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुँच गया। जैसे ही चाची की चूत से पानी की एक फुहार निकली, मैंने भी आह... आह्ह... की आवाज़ के साथ वीर्य की पिचकारी चाची की चूत में छोड़ दी। जब चाची को चूत के अंदर मेरे वीर्य की गर्मी महसूस हुई तो वे चौंक पड़ी। उन्होंने मुझे अपने ऊपर से उतारा और अपने हाथ चूत पर लगा कर देखने लगी।
उन्होंने जब अपने पानी और  मेरे वीर्य का मिश्रण देखा तो घबरा कर बोली - यह क्या किया तूने? मैंने तुझे कंडोम पहनने को कहा था ना?  
मैंने कहा – लेकिन मैंने तो आपके सामने ही कंडोम चढाया था।  
चाची ने और मैंने एक साथ लंड पर नज़र डाली। उस पर अब भी कंडोम चढ़ा हुआ था पर फटा हुआ!
यह देख कर चाची हँसते हुए बोलीं - इसमें तेरा दोष नहीं है। कंडोम तेरे चाचा के नाप का था। कल तेरे साइज़ के लाने पड़ेंगे।  
मुझे पता नहीं था कि कंडोम के भी साइज़ होते हैं पर मैं खुश था कि चाची की नाराज़गी दूर हो गई थी और मुझे उनकी चूत का सुख मिलता रहेगा।
उस पहले सुखद अनुभव के बाद मैंने मन लगा कर प्रैक्टिस शुरू कर दी। अब तो मैं चाची को लगभग रोज चोदता हूँ,  अधिकतर दिन में और जब चाचा बाहर जाते हैं तब रात को भी! चाची भी कभी चुदने से इंकार नहीं करती। अभी चार घंटे पहले ही चुद कर गई हैं।  
पर चार घंटे तो बहुत होते हैं। लिखते-लिखते मेरा लंड फिर खड़ा हो गया है। आपकी इज़ाज़त हो तो अब जाऊं – अपनी चाची के पास!
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01-20-2014, 07:13 PM
Post: #3
RE: चाची के चुंचुक
What is this? Why these 'FONT" 'SIZE" etc in the text?
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01-20-2014, 11:41 PM
Post: #4
Wank RE: चाची के चुंचुक
(01-20-2014 07:13 PM)porngyan Wrote: What is this? Why these 'FONT" 'SIZE" etc in the text?
some font sizes which are available in vbulletin are not present in mybb, so those fonts dont show up.  It is better to post them as text (bb editor disable - use last button in above bar) and then add fonts, size etc.

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01-21-2014, 09:13 PM
Post: #5
RE: चाची के चुंचुक
Thank you for editing the post. Which is the most appropriate Hindi font and font size?
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